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तमिलनाडु: एआईएडीएमके ने टीवीके सरकार पर ‘विधायकों की खरीद-फरोख्त’ का आरोप लगाया

चेन्नई, 26 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु में सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार और विपक्षी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के बीच राजनीतिक टकराव मंगलवार को और तेज हो गया। एआईएडीएमके ने सरकार पर सक्रिय रूप से दलबदल को बढ़ावा देने और विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया।
 
तमिलनाडु: एआईएडीएमके ने टीवीके सरकार पर ‘विधायकों की खरीद-फरोख्त’ का आरोप लगाया

चेन्नई, 26 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु में सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार और विपक्षी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के बीच राजनीतिक टकराव मंगलवार को और तेज हो गया। एआईएडीएमके ने सरकार पर सक्रिय रूप से दलबदल को बढ़ावा देने और विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया।

सचिवालय में विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व वाले गुट के विधायक अग्रि कृष्णमूर्ति ने एआईएडीएमके विधायकों से जुड़े हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की और अयोग्यता कार्यवाही के संचालन पर सवाल उठाए।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने सभी एआईएडीएमके विधायकों को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव के दौरान टीवीके सरकार के खिलाफ मतदान करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।

हालांकि, उनके अनुसार, पार्टी के 25 विधायकों ने निर्देश का उल्लंघन किया और सत्ताधारी दल के समर्थन में मतदान किया।

मतदान के बाद, एआईएडीएमके ने दलबदल विरोधी कानून के तहत विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अध्यक्ष को एक याचिका सौंपी।

कृष्णमूर्ति ने बताया कि अध्यक्ष ने पार्टी को सूचित किया कि याचिका पर अभी विचार चल रहा है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

एआईएडीएमके नेता ने तीन विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाने पर भी सवाल उठाया, जबकि उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही अभी भी लंबित थी।

उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी ने अध्यक्ष से विशेष रूप से अनुरोध किया था कि दलबदल विरोधी याचिका का निपटारा होने तक इन इस्तीफों पर कार्रवाई न की जाए।

कृष्णमूर्ति के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में इस्तीफे स्वीकार करना प्रक्रियात्मक और लोकतांत्रिक दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम विधानसभा के नियमों के विपरीत है और इससे एक अस्वस्थ राजनीतिक मिसाल कायम हो सकती है।

सत्ताधारी पार्टी की आलोचना को और बढ़ाते हुए कृष्णमूर्ति ने सवाल उठाया कि क्या सचिवालय राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय के रूप में कार्य कर रहा है या टीवीके पार्टी कार्यालय के विस्तार के रूप में।

सरकार पर तीखे शब्दों में हमला करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों की खरीद-फरोख्त बहुत तेजी से हो रही है और दावा किया कि इस्तीफा देने वाले कुछ विधायकों को मिनटों के भीतर टीवीके के पहचान पत्र जारी कर दिए गए।

उन्होंने आगे चेतावनी दी कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस्तीफा देने और राजनीतिक निष्ठा बदलने के लिए प्रोत्साहित करने से तमिलनाडु की राजनीति में व्यापक अस्थिरता पैदा हो सकती है और दलबदल में तेजी आ सकती है।

--आईएएनएस

एमएस/