गुजरात: पुलिस आवास और कार्यालयों के रखरखाव के लिए नई नीति लागू, अब सीधे होगी सामग्री की खरीद
गांधीनगर, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात पुलिस ने पुलिस आवासीय भवनों और कार्यालय परिसरों में प्रत्येक मरम्मत कार्य के लिए तीन कोटेशन प्राप्त करने की प्रथा को बंद कर दिया है। इसके स्थान पर सीधे सामग्री की खरीद और स्टॉक बनाए रखने की प्रणाली अपनाई जाएगी, जिससे रखरखाव में तेजी आएगी और पारदर्शिता में सुधार होगा।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जीएस मलिक ने राज्य भर में आवासीय और गैर-आवासीय पुलिस भवनों की नियमित और विशेष मरम्मत के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।
2025-26 में किए गए मरम्मत कार्यों की समीक्षा में पाया गया कि लगभग 19 करोड़ रुपए के कुल व्यय में से 4,789 कार्यों में से 4,119 कार्य, जिनकी लागत 17.48 करोड़ रुपए थी, तीन कोटेशन प्रणाली के माध्यम से किए गए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया के कारण स्वीकृतियों में देरी, प्रशासनिक कठिनाइयां और अनियमितताओं के आरोप लगे। संशोधित प्रणाली के तहत कार्यालय मरम्मत के अलग-अलग कार्यों के बजाय सामग्री के लिए तीन कोटेशन प्राप्त करेंगे।
वे सिविल और विद्युत कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखेंगे, उसी प्रणाली का पालन करते हुए जो पहले से ही पुलिस मुख्यालय में कपड़ों के लिए उपयोग की जाती है।
सभी कार्यालयों को निर्धारित प्रारूप में स्टॉक और जारी करने के रजिस्टर बनाए रखने होंगे। प्रथम या द्वितीय श्रेणी का अधिकारी सामग्री का भौतिक सत्यापन करेगा और प्रत्येक माह की पांच तारीख तक प्रमाण पत्र जारी करेगा।
कार्यालय प्रमुख को भी प्रत्येक तीन माह में एक बार, 10 जनवरी, 10 अप्रैल, 10 जुलाई और 10 अक्टूबर तक स्टॉक का व्यक्तिगत निरीक्षण करना होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली के फिटिंग, स्पेयर पार्ट्स और प्लंबिंग सामग्री सहित आवश्यक आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि नलों से पानी टपकना, लाइट और पंखे की खराबी, वायरिंग में गड़बड़ी और पाइपलाइन लीक जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान प्रत्येक कार्य के लिए नए कोटेशन का इंतजार किए बिना किया जा सके।
सामग्री अधिकृत डीलरों से प्रतिस्पर्धी दरों पर खरीदी जाएगी और जांच में सुविधा के लिए रिकॉर्ड बनाए रखा जाएगा। मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) में प्रतिष्ठित कंपनियों से गुणवत्तापूर्ण सामग्री के उपयोग का भी प्रावधान है ताकि बार-बार मरम्मत की आवश्यकता कम हो सके।
मरम्मत का काम श्रम एवं रोजगार विभाग द्वारा निर्धारित दैनिक मजदूरी दरों पर अर्ध-कुशल श्रमिकों को लगाकर किया जाएगा।
यदि बड़ी मरम्मत का काम केवल सामग्री की खरीद से पूरा नहीं हो सकता है और इसके लिए तीन कोटेशन वाली प्रक्रिया की आवश्यकता होती है, तो आयुक्त कार्यालय, जिला या इकाई स्तर पर काम शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी पुलिस आयुक्त या रेंज प्रमुख, जैसा भी लागू हो, से पूर्व लिखित स्वीकृति अनिवार्य होगी।
50,000 रुपए से अधिक लागत वाले कार्यों को "विशेष मरम्मत" के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। ऐसे कार्यों के लिए प्रस्ताव गुजरात राज्य पुलिस आवास निगम लिमिटेड के कार्यकारी अभियंता के परामर्श से तैयार किए जाने चाहिए।
एसओपी के मुताबिक, आवासीय भवनों और कार्यालयों से संबंधित मरम्मत शिकायतों को दर्ज करने के लिए अलग-अलग रजिस्टर बनाए जाने चाहिए, जिनमें शिकायतों के समाधान की तिथियां भी शामिल हों।
प्रशासनिक विलंब को कम करने, रखरखाव में सुधार करने और सार्वजनिक धन के उपयोग में जवाबदेही को मजबूत करने के उद्देश्य से यह नई प्रक्रिया गुजरात भर में पुलिस आवासीय सुविधाओं और कार्यालय परिसरों पर लागू होगी।
--आईएएनएस
एएसएच/वीसी
