इडुक्की में 25 साल बाद मंत्री रोशी ऑगस्टीन सबसे कठिन चुनावी परीक्षा का सामना करने के लिए तैयार
तिरुवनंतपुरम, 5 फरवरी (आईएएनएस)। केरल के इडुक्की विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय तक कांग्रेस (एम) के निर्विवाद चेहरे रहे राज्य के जल संसाधन मंत्री रोशी ऑगस्टीन अब अपने करियर की सबसे कठिन चुनावी लड़ाई के लिए तैयार हैं। वह लगातार छठी बार चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
56 साल के मंत्री ने लगातार राजनीतिक मुश्किलों का सामना किया है और इडुक्की से लगातार पांच चुनाव जीते हैं। वे अपने नरम स्वभाव और आसानी से मिलने-जुलने वाले अंदाज के लिए जाने जाते हैं। इनमें से चार जीत तब मिलीं, जब उनकी पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का हिस्सा थी।
2021 के विधानसभा चुनावों से पहले केरल कांग्रेस (एम) का सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) में शामिल होना भी उनकी जीत की लय को नहीं रोक सका और ऑगस्टीन ने लगातार पांचवीं बार चुनाव जीत लिया।
राजनीतिक किस्मत तब और चमकी, जब अनुभवी नेता के.एम. मणि के बेटे और पार्टी चेयरमैन जोस के. मणि को पाला निर्वाचन क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। मैदान में कोई वरिष्ठ नेता न होने के कारण, ऑगस्टीन को दूसरे पिनाराई विजयन कैबिनेट में मंत्री बनाया गया और उन्हें जल संसाधन विभाग सौंपा गया। उनका मंत्री पद का कार्यकाल अब तक बिना किसी विवाद के गुज़रा है, जिससे उनकी प्रशासनिक विश्वसनीयता बढ़ी है।
हालांकि, पार्टी के अंदर अब मतभेद सामने आने लगे हैं। बताया जा रहा है कि जोस के. मणि यूडीएफ में लौटना चाहते थे। लेकिन, ऑगस्टीन इस कदम का विरोध करने वाले मुख्य नेता बने। ये मतभेद खुलकर सामने आने के कारण, जोस को एलडीएफ छोड़ने की खबरों का सार्वजनिक रूप से खंडन करना पड़ा और उन्होंने मीडिया के कुछ हिस्सों पर अटकलें फैलाने का आरोप लगाया।
जोस के करीबी नेता कथित तौर पर नाखुश हैं। उनका मानना है कि ऑगस्टीन ने ही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से व्यक्तिगत कॉल मिलने के बाद प्रस्तावित बदलाव को रोक दिया, जिसमें पार्टी से एलडीएफ के साथ बने रहने का आग्रह किया गया था।
चुनाव में खतरे के संकेत भी साफ दिख रहे हैं। ऑगस्टीन की जीत का अंतर लगातार कम होता गया है, 2011 में 15,806 वोट, 2016 में 9,333 वोट और 2021 में सिर्फ 5,573 वोट। वहीं, कांग्रेस भी इडुक्की सीट को वापस लेना चाहती है। यह ऐसी सीट है, जिस पर कांग्रेस ने 1987 के बाद चुनाव नहीं लड़ा, क्योंकि उसने इसे लंबे समय से अपने सहयोगियों, जिनमें केरल कांग्रेस के अलग-अलग गुट शामिल हैं, के लिए छोड़ दिया था। अगर कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारती है, तो ऑगस्टीन 25 साल में पहली बार एक मुश्किल और कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में पड़ सकते हैं और यह उनकी अपनी पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को और बढ़ा देगा।
--आईएएनएस
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