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अफगानिस्तान की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान को 'एकमात्र खतरा' बताते हुए राजदूत ने लगाए गंभीर आरोप

काबुल, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान का मानना है कि पाकिस्तान उसके देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए 'एकमात्र खतरा' है। रूस में अफगानिस्तान के राजदूत गुल हसन हसन ने पड़ोसी मुल्क को लेकर टिप्पणी की।
 

काबुल, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान का मानना है कि पाकिस्तान उसके देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए 'एकमात्र खतरा' है। रूस में अफगानिस्तान के राजदूत गुल हसन हसन ने पड़ोसी मुल्क को लेकर टिप्पणी की।

मास्को में सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ), स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (सीआईएस) और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के संयुक्त सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए हसन ने इस्लामाबाद पर आईएसआईएस (दाएश) समेत कई आतंकवादी संगठनों को शरण देने का आरोप लगाया। अफगानिस्तानी मीडिया टोलो न्यूज ने यह रिपोर्ट दिखाई।

उन्होंने आरोप लगाया कि ये संगठन पाकिस्तान के भीतर सक्रिय हैं और इसके सदस्यों को अफगानिस्तान में भेजने की कोशिशें भी की गई हैं।

हसन ने कहा, “हमें स्पष्ट रूप से कहना होगा कि अब हमारे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पाकिस्तान से पैदा हो रहा है। पाकिस्तान न केवल अफगान सरकार के सशस्त्र विरोधियों को शरण देता है, बल्कि उसने वहां मादक पदार्थों के कारोबार और दाएश की गतिविधियों के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार किया है।”

उन्होंने कहा कि ये आरोप निराधार नहीं हैं और पाकिस्तानी तथा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई खबरों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

हसन ने आगे आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने इन संगठनों को गतिविधियां चलाने, नए सदस्यों की भर्ती करने और धन जुटाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराई हैं।

उन्होंने दावा किया कि 23 जुलाई को इन आतंकवादी संगठनों से जुड़े सैकड़ों सशस्त्र लड़ाकों को पाकिस्तान के चित्राल के रास्ते अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत के जेबक जिले में लाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि इसी तरह की दूसरी कोशिश 25 सितंबर को नूरिस्तान प्रांत के कमदेश जिले में की गई।

हसन के मुताबिक, “इन प्रयासों के दौरान पाकिस्तानी सैन्य बलों ने न केवल संबंधित समूहों का सीधे नेतृत्व किया, बल्कि दोनों मौकों पर अफगानिस्तान के विभिन्न प्रांतों में हवाई बमबारी भी की।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लड़ाकों के सीमा पार करने के रास्तों पर स्थित अफगान सीमा बलों की चौकियों को तोपों और भारी हथियारों से निशाना बनाया गया।

इस बीच, तालिबानी प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तानी अधिकारियों पर बातचीत की प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी समाधान तलाशने के बजाय प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मुजाहिद ने इसे इस्लामाबाद की ‘नाकाम नीति’ बताया था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में मुजाहिद ने कहा कि अपनी विफलताओं के लिए अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराने से पाकिस्तान की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने पाकिस्तान के राजनीतिक, सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक संकटों को गंभीर चिंता का विषय बताया।

--आईएएनएस

केआर/