Aapka Rajasthan

मीर यार बलूच का पाक राष्ट्रपति की हिंदुओं वाले बयान पर फूटा गुस्सा, जरदारी को विभाजनकारी बताया

क्वेटा, 17 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का 14 अगस्त का भाषण इन दिनों काफी चर्चा में है। राष्ट्रपति जरदारी ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण में हिंदू समुदाय को लेकर शर्मनाक बयान दिया, जिसकी प्रमुख बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने कड़ी निंदा की।
 

क्वेटा, 17 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का 14 अगस्त का भाषण इन दिनों काफी चर्चा में है। राष्ट्रपति जरदारी ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण में हिंदू समुदाय को लेकर शर्मनाक बयान दिया, जिसकी प्रमुख बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने कड़ी निंदा की।

मीर यार बलूच ने आरोप लगाया कि यह जहरीला और विभाजनकारी बयान पाकिस्तानी सैन्य जनरलों ने लिखा था और उनके राजनीतिक मोहरे के जरिए दिलवाया गया।

पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ।

उसमें जरदारी ने कहा कि उनका देश और यहां की मुस्लिम-बहुल आबादी हिंदू समुदाय को बर्दाश्त करती है, जिनकी आबादी करीब 3-4 फीसदी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मीर ने लिखा कि जरदारी का यह कहना कि पाकिस्तान हिंदुओं को बर्दाश्त करता है, इस सच्चाई को नजरअंदाज करता है कि विभाजन के बाद पाकिस्तान में रह गए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को धार्मिक कट्टरता और उग्रवाद का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद भी अल्पसंख्यकों पर दबाव, जबरदस्ती और पाबंदियां लगाने का इतिहास रहा है। इसमें लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के प्रयास और उनके मौलिक अधिकारों पर रोक शामिल हैं। यह एक शर्मनाक अध्याय है।

बलूच कार्यकर्ता ने कहा, "पाकिस्तान ने हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण, सम्मान और सुरक्षा के लिए बहुत कम काम किया है। इसके विपरीत, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव, उनके व्यापार और रोजगार के अवसरों पर रोक और अपनी धार्मिक परंपराओं को स्वतंत्र रूप से निभाने में बाधाएं डालने की दर्ज घटनाएं पाकिस्तान के काले इतिहास का हिस्सा रही हैं।"

मीर ने पाकिस्तान के सहिष्णुता के दावों में ऐतिहासिक विरोधाभास को उजागर किया। उन्होंने कहा कि जरदारी पंजाबी जनरलों द्वारा दिए गए राष्ट्रपति पद पर बैठे हैं और वो शायद भूल गए हैं कि उनके ससुर, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के शासन में लाखों बांग्लादेशी बंगालियों पर किस तरह का बर्बर सैन्य दमन हुआ था।

उन्होंने कहा, "लाखों बंगालियों की हत्या की गई और बड़ी संख्या में बंगाली महिलाओं के साथ यौन हिंसा की गई। पाकिस्तान मुसलमानों को भी बर्दाश्त नहीं कर सकता, फिर हिंदुओं को बर्दाश्त करने की बात तो बहुत दूर है।"

बलूच कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि जरदारी की पार्टी ने बांग्लादेशी बंगालियों के नरसंहार के दौरान भी राजनीतिक भूमिका निभाई, ताकि पाकिस्तानी सेना को खुश किया जा सके और सत्ता में बने रहा जा सके। कई मौकों पर, पार्टी इसी तरह सैन्य ऑपरेशन और बलूचिस्तान में लोगों के खिलाफ मानवाधिकार के गंभीर उल्लंघन से खुद को दूर रखने में नाकाम रही है।

मीर यार बलूच ने कहा, "1973 में जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार के दौरान, बलूच इलाकों में एक सैन्य ऑपरेशन शुरू किया गया था, जिसके नतीजे में हजारों बलूच मारे गए और बड़ी संख्या में लोगों को गायब कर दिया गया। इसी तरह, मौजूदा सरकार के दौरान, बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर सैन्य ऑपरेशन और सुरक्षा कार्रवाई जारी रही है, जिससे बलूचिस्तान में गंभीर चिंताएं और विरोध पैदा हुए हैं।"

--आईएएनएस

केके/एबीएम