अभिषेक बनर्जी पर हमले के मामले में टीएमसी का आरोप, 'गिरफ्तारियां सिर्फ दिखावा'
कोलकाता, 31 मई (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुए हमले और दुर्व्यवहार के मामले में छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद पार्टी ने रविवार को आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई केवल औपचारिकता भर है और घटना के असली आरोपी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े हुए हैं।
टीएमसी ने अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और पूछा कि क्या एक सांसद को दी गई केंद्रीय सुरक्षा ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान उनके साथ मौजूद रहेगी।
गिरफ्तारियों पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि पुलिस ने घटना के मुख्य आरोपियों को नहीं पकड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहा है।
रॉय ने आईएएनएस से कहा, "यह सिर्फ दिखावे की कार्रवाई है। असली आरोपी सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता थे, लेकिन उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। जिस तरह अभिषेक के सोनारपुर दौरे के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कोई एहतियाती कदम नहीं उठाया, उसी तरह अब भी दोषियों की गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। आपने देखा कि अभिषेक के पूरे शरीर पर हमला किया गया, लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।"
दरअसल, शनिवार को अभिषेक बनर्जी सोनारपुर में एक मृत टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने गए थे। इस दौरान रास्ते में उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने उन पर अंडे और ईंट के टुकड़े फेंके, जबकि प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उनके खिलाफ नारेबाजी भी की।
टीएमसी नेता और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को मृतक कार्यकर्ता के घर तक पैदल जाते समय विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेरने और मुक्का मारने की भी कोशिश की, हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें बचा लिया।
भाजपा नेताओं द्वारा इस घटना को टीएमसी के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश का परिणाम बताए जाने पर सौगत रॉय ने इस दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए भ्रामक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह निराधार है। भाजपा यह नैरेटिव गढ़ रही है कि जनता में टीएमसी के खिलाफ भारी गुस्सा है। लेकिन राज्य में टीएमसी को 2.60 करोड़ वोट मिले हैं। आम लोगों के पास टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमला करने के अलावा और भी काम हैं। यह केवल भाजपा के गुंडे और असामाजिक तत्व हैं, जिन्हें उनके राज्य स्तरीय नेताओं द्वारा उकसाया जा रहा है।"
अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर रॉय ने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि केंद्रीय सुरक्षा बल भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के दौरान उनके साथ रहेंगे या नहीं।
उन्होंने कहा, "केंद्रीय बल उनके साथ जाएंगे या नहीं, यह कहना मुश्किल है। पहले केंद्रीय बलों का इस्तेमाल टीएमसी शासन के दौरान भाजपा नेताओं की सुरक्षा के लिए किया जाता था। अभिषेक बनर्जी के साथ वे रहेंगे या नहीं, यह फिलहाल अटकलों का विषय है।"
वहीं, भाजपा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए खुद को इससे पूरी तरह अलग बताया है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि किसी भी राजनीतिक नेता के खिलाफ हिंसा अस्वीकार्य है और किसी लोकतांत्रिक समाज में इसका समर्थन नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करती। अभिषेक बनर्जी के साथ जो हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। भाजपा का इस घटना से कोई संबंध नहीं है।"
समिक भट्टाचार्य ने आगे कहा, "अगर टीएमसी के लोग ही टीएमसी पर हमला करें तो उसमें भाजपा क्या कर सकती है? पुलिस अपना काम कर रही है और सभी देख रहे हैं कि किन लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। इस घटना में राजनीतिक दलों को घसीटना उचित नहीं है।"
इस बीच, शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने इस घटना को किसी नए राजनीतिक घटनाक्रम के बजाय जनता की नाराजगी की अभिव्यक्ति बताया।
उन्होंने कहा, "यह कोई नया राजनीतिक रुझान नहीं है, बल्कि लोगों की प्रतिक्रिया है। टीएमसी सरकार के दौरान दबा हुआ जनाक्रोश अब सामने आ रहा है। यह टीएमसी पर लगाए जाने वाले अन्याय और अत्याचार के आरोपों के खिलाफ जनता की नाराजगी को दर्शाता है।"
वाघमारे ने दावा किया कि विभिन्न मुद्दों को लेकर जनता के एक वर्ग में लंबे समय से असंतोष था, जो अब खुलकर दिखाई देने लगा है।
--आईएएनएस
डीएससी
