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पी चिदंबरम समेत पांच कांग्रेस सांसदों ने संसद में यूपीआई के लिए एमडीआर ढांचे का समर्थन किया

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा 2,000 रुपए से अधिक के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर शुल्क लगाने के फैसले की आलोचना की। वहीं पांच कांग्रेस सांसदों (पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ) ने संसद में यूपीआई के लिए स्तरीय मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर)/राजस्व ढांचे का समर्थन किया।
 

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा 2,000 रुपए से अधिक के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर शुल्क लगाने के फैसले की आलोचना की। वहीं पांच कांग्रेस सांसदों (पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ) ने संसद में यूपीआई के लिए स्तरीय मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर)/राजस्व ढांचे का समर्थन किया।

इस वर्ष वित्त संबंधी स्थायी समिति ने यूपीआई के लिए स्तरीय एमडीआर/राजस्व ढांचे पर जोर दिया और कहा कि इसे बिना देरी किए अधिसूचित और कार्यान्वित किया जाना चाहिए।

समिति के सदस्य रहे पांच कांग्रेस सांसदों (पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम और पूर्व केंद्रीय मंत्री तिवारी शामिल) 12 अगस्त को संसद में रिपोर्ट पारित होने के समय उपस्थित थे और उन्होंने प्रकाशित कार्यवृत्त में किसी ने भी असहमति दर्ज नहीं की।

समिति के अनुसार यूपीआई इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवहार्य राजस्व तंत्र स्थापित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि सरकार के खजाने पर लगातार बोझ न पड़े।

समिति ने सिफारिश की कि यद्यपि प्रस्तावित तीन वर्षीय बहुवर्षीय योजना और कैशबैक घटक टियर 3-6 शहरों में डिजिटल भुगतान को लोकतांत्रिक बनाने के लिए आवश्यक हैं, फिर भी वित्तीय सेवा विभाग को एक आत्मनिर्भर, स्तरीय राजस्व मॉडल पर भी विचार करना चाहिए।

समिति ने यह भी पाया कि व्यवहार्य राजस्व मॉडल की अनिवार्यता पर जोर देने वाली अपनी पिछली सिफारिशों के अनुसरण में, स्तरीय एमडीआर संरचना के लिए विधायी प्रावधान लाए गए हैं।

समिति के विचार में, हालांकि उच्च मूल्य के लेनदेन पर कैलिब्रेटेड एमडीआर की अनुमति देने के लिए वैधानिक प्रावधान मौजूद हैं, इस ढांचे को अधिसूचित करने और लागू करने में किसी भी देरी से भुगतान सेवा प्रदाता अपर्याप्त सब्सिडी पर अत्यधिक निर्भर हो जाते हैं, जिससे साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और नेटवर्क अवसंरचना में महत्वपूर्ण निवेश खतरे में पड़ जाते हैं।

बुधवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने यूपीआई शुल्क को लेकर राहुल गांधी की चिंताओं और उनके इस आरोप को खारिज कर दिया कि यह निर्णय अमेरिका के दबाव में लिया गया है। उन्होंने इस दावे को निराधार बताते हुए केंद्र सरकार के कदम का बचाव किया।

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि 2,000 रुपए तक के यूपीआई लेनदेन से संबंधित निर्णय निष्पक्ष है और इससे छोटे विक्रेताओं और व्यवसायों को कोई कठिनाई नहीं होगी।

उन्होंने राहुल गांधी के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि यह निर्णय अमेरिका के दबाव में लिया गया है और कहा कि दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है।

अठावले ने कहा कि राहुल गांधी का यह आरोप कि यह कदम अमेरिकी दबाव में उठाया गया है, पूरी तरह निराधार है। राहुल गांधी झूठ फैलाने में माहिर हैं और विभिन्न मुद्दों पर अक्सर भ्रामक दावे करते हैं। इस निर्णय से अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है।

--आईएएनएस

एमएस/