कर्नाटक के 25 अन्य तालुकों को जल्द ही सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की संभावना : उपमुख्यमंत्री परमेश्वर
बेंगलुरु, 8 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार अभी सूखे का आकलन करने के दूसरे चरण का काम कर रही है और जल्द ही राज्य के 25 अन्य तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की संभावना है।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए परमेश्वर ने कहा कि राज्य में सूखे का आकलन करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और इसे चरणों में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "पहले चरण में 101 तालुकों को पहले ही सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। दूसरे चरण का आकलन अभी चल रहा है। 25 तालुका सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित किए जाने के लिए योग्य पाए गए हैं और जल्द ही उनकी घोषणा की जाएगी।"
परमेश्वर ने कहा कि प्रक्रिया में कोई देरी नहीं हुई है और दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व मानसून की स्थिति स्पष्ट होने तक आकलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, "पिछले साल, लगभग 200 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था। इस साल भी ऐसी स्थिति है कि 200 से ज्यादा तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा सकता है। तटीय क्षेत्र को छोड़कर, पूरे राज्य में सूखे जैसे हालात हैं।"
कुछ विधायकों के विरोध और यह आरोप लगाने पर कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों को जानबूझकर सूखा प्रभावित सूची से बाहर रखा गया है, परमेश्वर ने कहा कि किसी को भी इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है कि गंभीर सूखे का सामना करने के बावजूद उनके तालुकों को छोड़ दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, "आज पूरा राज्य सूखे का सामना कर रहा है। किन तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए, यह तय करने में राज्य सरकार के किसी व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं है। कुछ तालुकों को जानबूझकर छोड़ने का आरोप बेबुनियाद है।"
उन्होंने बताया कि सूखे का निर्धारण राजनीतिक संबद्धता के आधार पर नहीं किया जाता है और कहा कि विपक्ष के विधायकों वाले तालुका भी पहले से घोषित सूची में शामिल हैं। अगर राज्य सरकार केंद्र से मदद लेना चाहती है, तो वह केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किए बिना स्वतंत्र रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों की घोषणा नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा, "अगर राज्य सरकार खुद सूखा प्रभावित क्षेत्रों की घोषणा करती है, तो केंद्र से मदद मिलना संभव नहीं होगा। केंद्र से सूखे के लिए राहत मांगते समय हमारे लिए धैर्य रखना बेहतर है।"
उन्होंने बताया, "उपग्रह-आधारित तस्वीरों की जांच, जमीनी स्तर पर सत्यापन और वैज्ञानिक आकलन के बाद केंद्र सरकार के निर्धारित नियमों के आधार पर सूखा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान होती है। मैंने विधानसभा सत्र के दौरान भी यह बात स्पष्ट रूप से बताई थी।"
एनआईसीई जमीन और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौडा के मुद्दे पर परमेश्वर ने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि कैबिनेट के कई मंत्री प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों से ली गई जमीन से फायदा उठा रहे थे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मानवीय आधार पर और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 1,453 साइटें आवंटित करने का फैसला किया था। जिन किसानों की करोड़ों रुपए की जमीन कुछ लाख रुपयों के बदले चली गई, उनके साथ और अन्याय नहीं होना चाहिए। इसलिए, 1,453 साइटें आवंटित करने का फैसला लिया गया। सरकार का इस फैसले के जरिए किसी को व्यक्तिगत फायदा पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।
--आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
