सबरीमाला सोना चोरी केस: तंत्री के घर मिला वाजिवाहनम, 2017 के फैसले पर उठे गंभीर सवाल
तिरुवनंतपुरम, 16 जनवरी (आईएएनएस)। सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोने की चोरी मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। इस केस में गिरफ्तार तंत्री कांतारार राजीवर के घर से मंदिर का पवित्र और सजावटी ढांचा 'वाजिवाहनम' बरामद होने के बाद, साल 2017 में इसे सौंपने के फैसले पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
शुक्रवार को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के आयुक्त द्वारा जारी किया गया एक 2012 का आदेश सामने आया, जिसमें साफ लिखा है कि मंदिर की पूजा से जुड़े सामान और देवस्वोम की संपत्ति किसी भी व्यक्ति की निजी मिल्कियत नहीं हो सकती। साथ ही यह भी कहा गया है कि जब नए सामान लगाए जाएं, तो पुराने सामान को सार्वजनिक संपत्ति के रूप में सुरक्षित रखा जाए।
जानकारी के मुताबिक, 2017 में तत्कालीन यूडीएफ-नियुक्त त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (जिसकी अध्यक्षता पूर्व कांग्रेस विधायक प्रयार गोपालकृष्णन कर रहे थे) ने सबरीमाला मंदिर का वाजिवाहनम तंत्री कांतारार राजीवर को सौंप दिया था। उस समय बोर्ड में कांग्रेस नेता अजय थरायल और सीपीआई(एम) के एक प्रतिनिधि भी शामिल थे।
वाजिवाहनम एक विशेष सजावटी और धार्मिक संरचना है, जो सोने की परत चढ़े मिश्र धातु से बनी होती है और मंदिर के ध्वज स्तंभ पर स्थापित रहती है। हाल ही में, विशेष जांच दल (एसआईटी) ने राजीवर के घर पर छापा मारा, जहां से यह वाजिवाहनम बरामद किया गया।
राजीवर को 10 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें इस मामले में 13वां आरोपी बनाया गया है। केरल हाई कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने इस कथित सोना चोरी मामले में दो चार्जशीट दाखिल की हैं, जिनमें राजीवर का नाम शामिल है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि 2017 में वाजिवाहनम सौंपने का फैसला क्या नियमों का उल्लंघन था। कांग्रेस नेता अजय थरायल ने बोर्ड के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया परंपरा और तय नियमों के अनुसार की गई थी और इसमें कोई अनियमितता नहीं थी।
वहीं, योगक्षेम सभा के अध्यक्ष पीएनडी नम्पूथिरी ने भी कहा कि यह कदम लंबे समय से चली आ रही परंपराओं के तहत उठाया गया था और इसमें कुछ भी गलत नहीं था।
दूसरी ओर, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने कहा कि पिछले 50 वर्षों की घटनाओं की जांच में कोई बुराई नहीं है, लेकिन वाजिवाहनम के मुद्दे को सोना चोरी जांच से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
अब 2012 के आदेश के सामने आने के बाद, 2017 के फैसले पर कानूनी सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पूर्व बोर्ड और उसकी प्रशासनिक समिति के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
--आईएएनएस
वीकेयू/एबीएम
