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असम में चाय के 200 साल पूरे होने पर सीएम सरमा ने मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया

गुवाहाटी, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण करके उन्हें श्रद्धांजलि दी। दीवान को शुरुआती भारतीय चाय बागान मालिकों में से एक और एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है। यह कार्यक्रम असम में चाय के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
 

गुवाहाटी, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण करके उन्हें श्रद्धांजलि दी। दीवान को शुरुआती भारतीय चाय बागान मालिकों में से एक और एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है। यह कार्यक्रम असम में चाय के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

सरमा ने कहा कि यह श्रद्धांजलि असम के चाय उद्योग में दीवान के योगदान और राज्य के इतिहास में उनके स्थायी स्थान को मान्यता देने के लिए थी।

कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सरमा ने कहा कि जब असम 'असम चाय' के 200 साल का जश्न मना रहा है, तो हमें पहले भारतीय चाय बागान मालिक और स्वतंत्रता सेनानी मनीराम दीवान का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में प्रतिमा का अनावरण दीवान की स्थायी विरासत के प्रति एक श्रद्धांजलि थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में, हम विकास और विरासत दोनों का सम्मान करते हैं। उन्होंने राज्य सरकार के इस बात पर जोर दिया कि विकास के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित किया जाए।

यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब असम चाय के साथ अपने जुड़ाव की दो शताब्दियां मना रहा है। चाय उद्योग ने राज्य की अर्थव्यवस्था, पहचान और वैश्विक पहचान में एक अहम भूमिका निभाई है।

मणिराम दीवान असम में चाय की खेती के शुरुआती विकास से गहराई से जुड़े थे।

उन्होंने शुरुआत में ब्रिटिश प्रशासन के साथ काम किया और अपने खुद के चाय बागान शुरू करने से पहले उभरते हुए चाय उद्योग को अच्छी तरह समझा।

उन्हें चाय की खेती में कदम रखने वाले शुरुआती प्रमुख भारतीय उद्यमियों में से एक के तौर पर याद किया जाता है। यह वह समय था जब इस उद्योग पर मुख्य रूप से ब्रिटिश हितों का कब्जा था।

बाद में दीवान ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध में एक प्रमुख व्यक्ति बन गए।

1857 के विद्रोह के दौरान, उन्होंने असम में अहोम राजशाही को बहाल करने की कोशिशों का समर्थन किया और ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देने की कोशिश की।

अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और 1858 में उन्हें फांसी दे दी गई। इस तरह वे औपनिवेशिक शासन के खिलाफ असम के प्रतिरोध का एक अहम प्रतीक बन गए।

असम के आधुनिक चाय उद्योग ने 19वीं सदी में आकार लेना शुरू किया, जब इस इलाके में चाय के देसी पौधे पाए गए।

इसके बाद अंग्रेजों ने चाय के कमर्शियल बागान विकसित किए और असम दुनिया के चाय पैदा करने वाले प्रमुख इलाकों में से एक बन गया।

समय के साथ, असम की चाय ने अपने खास स्वाद, मजबूत गुण और अनोखी खुशबू के लिए दुनिया भर में पहचान बनाई।

यह उद्योग रोजगार का एक बड़ा जरिया बन गया और आज भी राज्य की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है।

200 साल पूरे होने के इस मौके पर चाय मजदूरों, उत्पादकों, उद्यमियों और उन समुदायों के योगदान पर फिर से ध्यान दिया जा रहा है, जिन्होंने पीढ़ियों से इस उद्योग को बनाए रखा है।

--आईएएनएस

एमएस/