गुजरात में बाढ़ प्रभावित 1.74 लाख लोगों का किया गया इलाज, सर्विलांस टीमें घर-घर कर रहीं जांच
गांधीनगर, 4 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात में भारी बारिश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। विभाग ने निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए हजारों टीमें तैनात की हैं और बाढ़ प्रभावित इलाकों में बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए मेडिकल कैंपों के जरिए 1.74 लाख से अधिक लोगों का इलाज किया है।
राज्य सरकार के अनुसार, मानसून से पहले और उसके दौरान सभी 34 जिलों और आठ नगर निगमों में एक व्यापक 'मानसून एक्शन प्लान' लागू किया गया था, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों को बाढ़ और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों से तेजी से निपटने में मदद मिली।
सरकार ने कहा कि अब तक सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई बड़ी आपातकालीन स्थिति सामने नहीं आई है और भारी बारिश व बाढ़ के बावजूद बीमारियों का प्रकोप काफी हद तक नियंत्रण में रहा है। विभाग ने राज्य स्तर, सभी जिलों और आठों नगर निगमों में चौबीसों घंटे काम करने वाले हेल्थ कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं।
राज्य, जिला और तालुका स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स टीमें काम कर रही हैं जबकि हर जिले को पांच अतिरिक्त इमरजेंसी मेडिकल टीमें दी गई हैं, जिन्हें खास गाड़ियां और स्टाफ़ भी उपलब्ध कराया गया है। स्वास्थ्य सेवा सहायता में कमजोर वर्गों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
विभाग ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों की 675 गर्भवती महिलाओं को पहले ही हेल्थकेयर सेंटर्स में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां 272 संस्थागत प्रसव सफलतापूर्वक कराए गए। बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंपों में रह रहे लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है।
108 इमरजेंसी सर्विस के तहत 1,496 एम्बुलेंस और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स व कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स से जुड़ी 816 एम्बुलेंस को स्टैंडबाय पर रखकर इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं को मजबूत किया गया है। बिजली कटौती के दौरान भी सेवाएं बिना रुकावट जारी रखने के लिए प्राइमरी और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स में जनरेटर और पर्याप्त डीजल की व्यवस्था की गई है।
बाढ़ के बाद होने वाली बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए विभाग ने 6,868 मेडिकल कैंप लगाए, जिनमें 1.74 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें मौके पर ही इलाज दिया गया।
18,000 से अधिक सर्विलांस टीमें प्रभावित इलाकों में रोज़ाना घर-घर जाकर जांच कर रही हैं। इन दौरों के दौरान, 1.05 करोड़ से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 10.29 लाख से अधिक ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) पैकेट बांटे गए।
अधिकारियों ने बताया कि पीने के सुरक्षित पानी को सुनिश्चित करने के लिए 10.52 लाख से अधिक रेजिडुअल क्लोरीन टेस्ट किए गए जबकि पीने के पानी की पाइपलाइन में हुई 3,061 से ज्यादा लीकेज को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया गया।
विभाग ने हेल्थकेयर सेंटर्स में 1.5 करोड़ से ज़्यादा क्लोरीन टैबलेट, 60 लाख से ज़्यादा ओआरएस पैकेट और 1,38,234 एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन भी उपलब्ध कराए हैं।
बाढ़ के मौसम में सांप के काटने के मामलों का तुरंत इलाज करने के लिए 108 एम्बुलेंस में एंटी-स्नेक वेनम भी उपलब्ध कराया गया है।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद लेप्टोस्पायरोसिस को रोकने के लिए वलसाड, सूरत, नवसारी और तापी जिलों के 562 गांवों में ज्यादा जोखिम वाले 7.61 लाख से ज्यादा लोगों को कीमोप्रोफिलैक्सिस के तौर पर डॉक्सीसाइक्लिन दी गई है।
राज्य सरकार ने मच्छर से फैलने वाली बीमारियों को कम करने के मकसद से एंटी-लार्वल उपाय और जन-जागरूकता गतिविधियां चलाने के लिए 497 अतिरिक्त वेक्टर कंट्रोल टीमें भी तैनात की हैं। अधिकारियों ने बताया कि ज़्यादा जोखिम वाले 106 गांवों में इनडोर रेसिडुअल स्प्रेइंग का पहला दौर पूरा हो चुका है और दूसरा दौर 1 अगस्त से शुरू होगा।
मच्छरों के पनपने पर रोक लगाने के लिए 4,998 स्थायी जल निकायों में लार्विवोरस गैम्बूसिया मछलियां भी छोड़ी गई हैं। अधिकारियों ने कहा, "हम मानसून से जुड़ी बीमारियों से बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए आशा वर्करों और वेक्टर कंट्रोल टीमों के ज़रिए जन-जागरूकता अभियान जारी रखे हुए हैं। मौजूदा मानसून सीज़न में पैदा होने वाली किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए भी तैयार हैं।"
--आईएएनएस
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