गुजरात: समुद्री पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए की गईं 17 प्रकाश स्तंभ में आधुनिक सुविधाएं
गांधीनगर, 14 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात के तट पर स्थित 17 प्रकाश स्तंभ में आधुनिक पर्यटन सुविधाएं दी गई हैं। इससे जहाजों को रास्ता दिखाने वाली ये पारंपरिक संरचनाएं अब राज्य के समुद्री इतिहास और विरासत को दिखाने वाले पर्यटन स्थलों में बदल गई हैं।
यह विकास केंद्र सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प की दृष्टि से महत्वपूर्ण लाइटहाउस को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से आकर्षक जगहों के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
गुजरात की तटरेखा देश में सबसे लंबी (2,340.62 किमी) है। गुजरात ने मांडवी, रावलपीर, समियानी, ओखा, कच्छीगढ़, पोरबंदर, मांगरोल, जाफराबाद, जेगरी, अलंग, घोघा, हजीरा, वलसाड खाड़ी, गोपनाथ, वेरावल, द्वारका और उमरगांव में लाइटहाउस पर पर्यटन सुविधाएं विकसित की हैं।
इन सुविधाओं में कैफेटेरिया, सुंदर बगीचे, गजेबो (बैठने की जगह), बच्चों के खेलने की जगह, एम्फीथिएटर, लाइट एंड साउंड शो, लिफ्ट और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल हैं। इसका मकसद पर्यटकों को ऐसा अनुभव देना है, जिसमें मनोरंजन के साथ-साथ समुद्री इतिहास, नेविगेशन और लाइटहाउस तकनीक की जानकारी भी मिले।
यह पहल 'मरीन एड्स टू नेविगेशन एक्ट, 2021' की धारा 23 के तहत की जा रही है। यह कानून नेविगेशन (रास्ता दिखाने) के काम के अलावा, हेरिटेज लाइटहाउस को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन उद्देश्यों के लिए विकसित करने और उन्हें हेरिटेज का दर्जा देने का प्रावधान करता है।
केंद्र सरकार ने देश भर में पर्यटन सुविधाओं के साथ विकास के लिए 75 लाइटहाउस की पहचान की है। गुजरात में द्वारका और गोपनाथ में लाइटहाउस म्यूजियम भी बनाए गए हैं, जहां पर्यटक लाइटहाउस तकनीक के विकास और भारत की समुद्री विरासत के बारे में जान सकते हैं।
इस विकास का मकसद युवा पीढ़ी को समुद्री नेविगेशन के इतिहास और लाइटहाउस की तकनीकी प्रगति से परिचित कराना है, साथ ही गुजरात के तटीय पर्यटन सर्किट में नई जगहों को जोड़ना है।
राज्य की लाइटहाउस पर्यटन पहल गुजरात की समुद्री विरासत को उजागर करने की एक बड़ी कोशिश का भी हिस्सा है। अहमदाबाद जिले के लोथल में 'नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स' (एनएमएचसी) विकसित किया जा रहा है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय इस प्रोजेक्ट को एक बड़े समुद्री विरासत परिसर के तौर पर पेश कर रहा है। इसमें म्यूजियम, इंटरैक्टिव एग्जिबिट और दूसरी सुविधाओं के जरिए भारत के समुद्री इतिहास को दिखाया जाएगा।
'मरीन एड्स टू नेविगेशन एक्ट, 2021' में खास तौर पर यह जरूरी बताया गया है कि हेरिटेज लाइटहाउस को इस तरह विकसित किया जाए कि नेविगेशन में मदद करने वाले उनके कामकाज पर कोई असर न पड़े और न ही उनकी बनावट और आर्किटेक्चर से कोई छेड़छाड़ हो।
इसके साथ बने नियमों में लाइटहाउस परिसर में पर्यटन को बढ़ावा देने और उनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विरासत से जुड़े महत्व को बनाए रखने का प्रावधान है।
17 जगहों पर पर्यटकों के लिए सुविधाएं जोड़ने से गुजरात के लाइटहाउस न सिर्फ समुद्री नेविगेशन के काम आने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर जाने जाएंगे, बल्कि ऐसी जगहों के तौर पर भी पहचाने जाएंगे जहां पर्यटक राज्य के समुद्र से जुड़े लंबे इतिहास को जान-समझ सकेंगे।
--आईएएनएस
एएसएच/डीएससी
