101 करोड़ भारतीय अब सामाजिक सुरक्षा दायरे में, ईपीएफओ के डिजिटलीकरण पर फोकस : केंद्र
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के दायरे में अब करीब 101 करोड़ लोग, यानी देश की 68 प्रतिशत से अधिक आबादी शामिल है। इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने भी सराहा है।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि ऐसा संतुलित विकास मॉडल जरूरी है, जो एक ओर श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को आगे बढ़ाए, वहीं दूसरी ओर नियोक्ताओं के लिए कारोबार करने में आसानी भी सुनिश्चित करे।
राष्ट्रीय राजधानी में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (एआईओई) और फिक्की की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगिक संबंधों में सामंजस्य बनाए रखने के लिए सरकार, उद्योग, नियोक्ता, श्रमिक और ट्रेड यूनियनों के बीच लगातार समन्वय आवश्यक है, ताकि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन साथ-साथ आगे बढ़ सकें।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास के लिए औद्योगीकरण बेहद जरूरी है, क्योंकि यह रोजगार सृजन को गति देता है। साथ ही उन्होंने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और सहकारी मॉडल, विशेषकर महिलाओं के नेतृत्व वाली पहलों की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि ये आजीविका के अवसर बढ़ाने, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
डॉ. मंडाविया ने रोजगार लोच में सुधार का जिक्र करते हुए कहा कि अब जीडीपी में प्रत्येक 1 प्रतिशत की वृद्धि पर रोजगार में 1.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है, जबकि 12 वर्ष पहले रोजगार वृद्धि का यह आंकड़ा केवल 0.008 प्रतिशत था।
उन्होंने बताया कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अपनी योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाला एकमात्र संस्थान नहीं रहेगा। उनके अनुसार, बेहतर प्रदर्शन करने वाले निजी अस्पतालों को भी ईएसआईसी सुविधाओं के रूप में नामित किया जा सकता है। उन्होंने इसे ईएसआईसी में होने वाले आगामी सुधारों का हिस्सा बताया।
केंद्रीय मंत्री ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा दावों की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने और एकल यूएएन (यूएएन) के जरिए खातों के स्वत: हस्तांतरण की दिशा में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने बताया कि यूपीआई (यूपीआई) आधारित निकासी की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
दक्षिण एशिया के लिए आईएलओ डीडब्ल्यूटी और भारत कार्यालय की निदेशक मिचिको मियामोतो ने कहा कि आईएलओ के अनुमान के अनुसार भारत में अब एक अरब से अधिक लोग कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में आ चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
--आईएएनएस
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