तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो की दक्षिण भारत में की गई कार्रवाई में 101 गिरफ्तार
हैदराबाद, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (टीजीसीएसबी) ने दक्षिण भारत में चलाए गए एक समन्वित और व्यापक बहु-राज्यीय साइबर अपराध अभियान में 18 महिलाओं सहित 101 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही लगभग 17 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी वाले लेनदेन का पता लगाया गया है।
टीजीसीएसबी की निदेशक शिखा गोयल ने बुधवार को बताया कि दो सप्ताह तक चलने वाला यह अभियान 23 सितंबर को शुरू हुआ और केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पुडुचेरी राज्यों में चलाया गया। इसका लक्ष्य विभिन्न प्रकार के साइबर वित्तीय अपराधों में शामिल व्यक्तियों और नेटवर्क को निशाना बनाना था।
टीजीसीएसबी द्वारा चलाया गया यह दूसरा समवर्ती बहु-राज्यीय अभियान है, जो राज्य सीमाओं के पार काम करने वाले और कई अधिकार क्षेत्रों का फायदा उठाने वाले साइबर अपराध नेटवर्क की पहचान करने, उनका पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।
गोयल ने एक विज्ञप्ति में कहा कि समन्वित जमीनी कार्रवाई के लिए 100 से अधिक टीजीसीएसबी कर्मियों वाली छह विशेष टीमें तैनात की गईं।
गिरफ्तार किए गए लोगों में से 19 की पहचान एजेंट के रूप में और 81 की पहचान अवैध लेन-देन खाताधारकों के रूप में हुई।
केरल से 35 गिरफ्तारियां हुईं, जबकि आंध्र प्रदेश से 22, कर्नाटक से 17, तमिलनाडु से 14, तेलंगाना से 12 और पुडुचेरी से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
इस अभियान के परिणामस्वरूप कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक भी जब्त किए गए, जिनका कथित तौर पर विभिन्न धोखाधड़ी वाले लेन-देन में इस्तेमाल किया गया था।
लगभग 17 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी वाले लेन-देन का पता फर्जी खातों के माध्यम से लगाया गया।
जांच से पता चला कि आरोपी विभिन्न आयु वर्ग, पेशे और शैक्षणिक पृष्ठभूमि से थे। अधिकांश आरोपी, 82 प्रतिशत, 20-50 वर्ष आयु वर्ग के थे, जबकि 17 प्रतिशत 50 वर्ष से अधिक आयु के थे।
व्यापार/स्वरोजगार सबसे बड़ा समूह था (23 प्रतिशत), इसके बाद निजी रोजगार (13 प्रतिशत), गृहिणी/घरेलू महिलाएं (10 प्रतिशत), ड्राइवर/ऑपरेटर (7 प्रतिशत), और बिक्री/विपणन (5 प्रतिशत) थे।
शैक्षिक दृष्टि से, 26 प्रतिशत ने इंटरमीडिएट शिक्षा प्राप्त की थी, 24 प्रतिशत स्नातक/डिग्री धारक थे, 16 प्रतिशत ने माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की थी, 11 प्रतिशत अशिक्षित थे, 7 प्रतिशत के पास डिप्लोमा/आईटीआई योग्यताएं थीं, और 4 प्रतिशत ने प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थीं, जबकि 3 प्रतिशत स्नातकोत्तर और 3 प्रतिशत के पास बी.टेक और नर्सिंग जैसी व्यावसायिक/अन्य योग्यताएं थीं।
इस अभियान में देश भर में साइबर अपराध से जुड़े कई आरोपियों की पहचान की गई, जिनमें एक प्रमुख कंपनी का कर्मचारी भी शामिल है। इस कर्मचारी ने कथित तौर पर कमीशन के बदले साइबर अपराध करने वालों के लिए फर्जी बैंक खाते खोलने में एजेंट की भूमिका निभाई। इसके अलावा, मुद्रा विनिमय व्यवसाय में लगा एक स्नातक भी कमीशन के आधार पर फर्जी खाते खोलने में सहायक रहा। एक पूर्व सैनिक भी साइबर अपराध गतिविधियों में शामिल था और देश भर में छह साइबर अपराध मामलों से जुड़ा हुआ था।
--आईएएनएस
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