कर्नाटक : अवैध बांग्लादेशियों से पूछताछ कर रहे कार्यकर्ताओं पर हमला, 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
बेंगलुरु, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। हेब्बागोडी पुलिस ने गुरुवार को 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन लोगों पर आरोप है कि 28 अक्टूबर को शिकारिपाल्या में इन्होंने चार 'कार्यकर्ताओं' के साथ मारपीट की। इन कार्यकर्ताओं में एक हिंदू संगठन के बेंगलुरु जिला अध्यक्ष भी शामिल थे, जिन्होंने वहां मौजूद अवैध बांग्लादेशी नागरिकों से सवाल-जवाब किए थे।
'राष्ट्ररक्षण पड़े' के बेंगलुरु जिला अध्यक्ष टी. नागेंद्रप्पा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 28 अक्टूबर को सुबह करीब 10 बजे एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन करके बताया कि शिकारीपाल्या में बांग्लादेशी नागरिक रह रहे हैं।
इस जानकारी के आधार पर, नागेंद्रप्पा उसी दिन शाम करीब 4:30 बजे अमित, पवन और संतोष कार्तल के साथ उस इलाके में पहुंचे; ये तीनों भी उसी संगठन के सदस्य हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब वे इलाके में एक शेड के पास पहुंचे, तो वहां मौजूद कुछ मजदूरों ने उन्हें रोक लिया और पूछा कि वे उन्हें बांग्लादेशी बताकर क्यों परेशान कर रहे हैं। मजदूरों ने वहां उनके आने पर आपत्ति जताई और उन चारों लोगों पर पत्थर और कांच के टुकड़े फेंकने लगे।
शिकायत के मुताबिक, जब नागेंद्रप्पा और उनके साथी वहां से निकलने की कोशिश करने लगे, तो करीब 100 अज्ञात लोगों ने उनका पीछा किया। आरोप है कि इस समूह ने चारों लोगों को जमीन पर गिरा दिया और उनके सिर, पैरों, छाती और पीठ पर लात मारकर बुरी तरह पीटा।
शिकायतकर्ता ने बताया कि हमलावरों ने इस दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। नागेंद्रप्पा ने इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
बताया जा रहा है कि यह घटना तब हुई जब नागेंद्रप्पा को इलाके में बांग्लादेशी नागरिकों के मौजूद होने की सूचना मिली थी। हालांकि, शिकायत में मजदूरों की राष्ट्रीयता के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है और न ही नागेंद्रप्पा को मिली सूचना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई है।
हेब्बागोडी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धाराओं 115(2), 118(1), 189(2), 190 और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया है।
ये धाराएं जानबूझकर चोट पहुंचाने, खतरनाक साधनों का इस्तेमाल करके चोट पहुंचाने, गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने (अवैध जमावड़ा), ऐसे जमावड़े के सदस्यों द्वारा किए गए अपराधों के लिए जिम्मेदारी, और आपराधिक धमकी देने जैसे अपराधों से संबंधित हैं।
आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह टकराव किन परिस्थितियों में हुआ और इस हमले में कौन-कौन लोग शामिल थे। याद दिला दें कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलुरु पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी और बेंगलुरु के डॉक्टर और एक्टिविस्ट टी. नागेंद्रप्पा के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) को रद्द कर दिया था।
नागेंद्रप्पा ने अधिकारियों को बेलंदूर और वर्तुर इलाकों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों (नसरीन और मोहम्मद बिलाल) की मौजूदगी के बारे में सूचित किया था।
इन दावों की जांच करने के बजाय, पुलिस ने तुरंत आपराधिक मामले दर्ज कर लिए और नागेंद्रप्पा को ही गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी उन लोगों की ओर से दर्ज कराई गई एक जवाबी शिकायत के आधार पर की गई थी, जिनके खिलाफ नागेंद्रप्पा ने शिकायत की थी।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने पुलिस की 'असामान्य जल्दबाजी' की आलोचना की और इस कानूनी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया। अदालत ने कहा कि ये जवाबी शिकायतें साफ तौर पर एक मुखबिर से बदला लेने की नीयत से की गई थीं।
--आईएएनएस
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