हाईकोर्ट के फैसले से भोजशाला में पूजा का अधिकार सुनिश्चित होगा: मोहन यादव
भोपाल ,15 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा भोजशाला को लेकर आए फैसले पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि इस फैसले से भोजशाला में श्रद्धालुओं का पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा।
दरअसल, कोर्ट ने कई वर्षों से चल रहे विवाद का शुक्रवार को पटाक्षेप कर दिया और अपने फैसले में कहा है कि भोजशाला राजा भोज ने बनवाई थी और इस परिसर का मंदिर स्वरूप है।
उच्च न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा, उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए दिया गया निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा।
भोजशाला की सरस्वती प्रतिमा वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में रखी हुई है। इसको लेकर मुख्यमंत्री यादव ने कहा मां वाग्देवी की प्रतिमा को यूके से भारत वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार को विचार करने का निर्देश स्वागत योग्य है। इस दिशा में राज्य सरकार भी आवश्यक प्रयास करेगी।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि हमारी संस्कृति सदैव ‘सर्वधर्म समभाव’, सामाजिक समरसता और भाईचारे की वाहक रही है। हम न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं और प्रदेश में सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव एवं सामाजिक सद्भाव को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। न्यायालय का यह निर्णय स्वागतयोग्य है। राज्य सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री डॉ स्वप्ना वर्मा ने उच्च न्यायालय की फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत भोजशाला जुड़े मामले में उच्च न्यायालय के फैसले से न्यायपालिका पर हमारा अटूट विश्वास और मजबूत हुआ है। न्यायपालिका पर हिंदू समाज की हमेशा से गहरी आस्था रही है। हम न्यायालय के इस फैसले का सम्मान करते हैं। उच्च न्यायालय के इस फैसले से लोगों को धार स्थित भोजशाला में माॅ वाग्देवी की पूर्जा-अर्चना का अधिकार मिला है।
--आईएएनएस
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