हजारीबाग कांड: भाजपा ने वापस लिया 'झारखंड बंद' का आह्वान, आदित्य साहू ने की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग
रांची, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने हजारीबाग के कुसुंबा (विष्णुगढ़) में नाबालिग बच्ची की नृशंस हत्या मामले में पुलिसिया खुलासे के बाद पूर्व घोषित आंदोलनों को वापस लेने का ऐलान किया है।
गुरुवार रात 9.30 बजे प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने 3 अप्रैल के मशाल जुलूस और 9 अप्रैल के 'झारखंड बंद' के कार्यक्रम को स्थगित करने की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने पुलिस द्वारा बताई गई 'बलि' की थ्योरी पर संदेह जताते हुए मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग दोहराई है।
आदित्य साहू ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के प्रचंड दबाव के कारण ही इस हत्याकांड का उद्भेदन हुआ है। उन्होंने पुलिस की 'बलि' वाली कहानी पर सवाल उठाते हुए कहा, "बलि देने के तरीके और पुलिस के दावों में विसंगतियां हैं, इसकी गहराई से छानबीन होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। पोक्सो एक्ट के उल्लंघन की भी जांच हो।"
उन्होंने इस हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपी भीम राम के भाजपा कार्यकर्ता होने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। साहू ने कहा कि भीम राम कभी भी पार्टी का सदस्य नहीं रहा और सत्ता पक्ष के दबाव में भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने सत्ताधारी दल झामुमो और कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'संवेदनहीन' करार दिया।
उन्होंने कहा, "जो लोग हत्याकांड के उद्भेदन आज सड़कों पर झंडा लेकर जश्न मना रहे हैं, वे 8 दिनों तक किस बिल में छिपे थे? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने इस जघन्य कांड पर एक ट्वीट तक नहीं किया और न ही पीड़ित परिवार से मिलने गए।"
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पिछले 6 वर्षों में लूट, हत्या और दुष्कर्म की घटनाएं बेतहाशा बढ़ी हैं, जो सरकार की तुष्टीकरण नीति का परिणाम है। आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड में पुलिस प्रशासन विधि-व्यवस्था सुधारने के बजाय बालू, कोयला और पत्थर माफियाओं से वसूली में व्यस्त है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में राज्य की किसी बेटी के साथ ऐसी दरिंदगी हुई या खनिज संपदा की लूट बंद नहीं हुई, तो भाजपा कार्यकर्ता पूरे झारखंड को ठप कर देंगे। उन्होंने रामगढ़ की हालिया घटना और रामनवमी के दौरान हुई पत्थरबाजी का जिक्र करते हुए कहा कि तुष्टीकरण के कारण बहुसंख्यक समाज के त्योहारों में अड़ंगा डालना आम बात हो गई है।
--आईएएनएस
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