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हरतालिका तीज की धूम, गणेश चतुर्थी के संयोग से दोगुनी हुई रौनक

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। हरतालिका तीज के पावन अवसर पर प्रयागराज और वाराणसी में महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। तीज और गणेश चतुर्थी का शुभ संयोग बनने से त्योहार की रौनक और बढ़ गई है।
 

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। हरतालिका तीज के पावन अवसर पर प्रयागराज और वाराणसी में महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। तीज और गणेश चतुर्थी का शुभ संयोग बनने से त्योहार की रौनक और बढ़ गई है।

व्रतधारी महिलाओं ने कहा कि यह व्रत माता पार्वती और भगवान शंकर के प्रेम का प्रतीक है, जिसे महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला रखती हैं। वहीं बाजारों में भी रौनक है, दुकानदारों के अनुसार महिलाएं सोलह श्रृंगार, साड़ियां, चूड़ियां और मेहंदी की खरीदारी कर रही हैं।

हरतालिका तीज के मौके पर वाराणसी की एक स्थानीय महिला ने कहा, "माता पार्वती और भगवान शंकर जी के प्रेम का प्रतीक तीज है। कथा के अनुसार, पार्वती जी सुबह से मिट्टी लाकर शंकरजी की मूर्ति बनाती हैं। इसे बनाने में उन्हें पूरा दिन लग गया था और बिना कुछ खाए-पीए ये व्रत उन्होंने रखा था। तब से ही औरतें निर्जला तीज का व्रत करती हैं। इसमें वो सोलह श्रृंगार करती हैं।

गणेश चतुर्थी को लेकर उन्होंने कहा कि ये बहुत अच्छा संयोग है। तीज के साथ गणेश भगवान की पूजा होती है। ये हर साल ही होता है। कभी-कभी ऐसा होता है कि सिर्फ तीज पड़ती है और कभी-कभी ऐसा है कि तीज में ही चौर्थ लग जाता है। महिलाएं तैयार होती हैं और साड़ियां खरीदती हैं। ये बहुत अच्छा है।

एक दुकान के मालिक आशीष कुमार गर्ग ने कहा कि मार्केटिंग बहुत अच्छी चल रही है। महिलाएं खूब खरीदारी कर रही हैं। हमारे यहां 18 साल से मेहंदी लगाई जाती रही है और उसी प्रकार से इस साल भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

सशी सिंह ने कहा कि तीज का महत्व यह है कि पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं व्रत रखती हैं। उस दिन महादेव पूरे परिवार के साथ धरती पर विराजमान होते हैं तो उनकी सेवा में महिलाएं बिना पानी के पूरे समय रहती हैं। पहले मेहंदी लगवाया जाता है, उसके बाद से चूड़ी पहनी जाती है, नई-नई साड़ी पहनी जाती है, और मेकअप करके निर्जला व्रत किया जाता है।

उन्होंने कहा कि बप्पा भी विराजमान हो रहे हैं। यह बहुत ही शुभ दिन है। महादेव अपने पूरे परिवार के साथ धरती पर आ रहे हैं।

प्रयागराज की महिला शालिनी राठौड़ ने कहा कि यह व्रत साल में एक बार अपने पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है और इसे लेकर सभी ग्रहणियों में बहुत उत्साह और उल्लास होता है। इसमें नए कपड़े, पायल, बिछियां, सुहाग का सामान सब कुछ लिया जाता है और यह निर्जला व्रत होता है। सभी स्त्रियों लिए यह बहुत कठिन व्रत होता है। 24 घंटे तक व्रत रहना पड़ता है।

पहली बार यह व्रत शिव जी के लिए माता पार्वती ने किया था। उन्हीं से प्रेरित होकर हम सब भी व्रत करते हैं। माता पार्वती जैसी तपस्या तो नहीं कर सकते, लेकिन कोशिश होती है कि कुछ तो कर सकें।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी