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पूर्व ओएसडी के घर ईडी की छापेमारी पर बोले हरीश रावत, भाजपा के लिए काम कर रहीं एजेंसियां

नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पूर्व निजी सहायक के आवास पर ईडी की छापेमारी को चुनावी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि 10 साल पुराने मामले को चुनाव से ठीक पहले उछालना एजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण है, जो भारतीय जनता पार्टी की चुनावी संभावनाओं के लिए काम कर रही हैं।
 

नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पूर्व निजी सहायक के आवास पर ईडी की छापेमारी को चुनावी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि 10 साल पुराने मामले को चुनाव से ठीक पहले उछालना एजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण है, जो भारतीय जनता पार्टी की चुनावी संभावनाओं के लिए काम कर रही हैं।

अपने पूर्व निजी सहायक के आवास पर ईडी की छापेमारी को लेकर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि चुनाव से पहले हर जगह इस तरह का माहौल बनाया जाता है। ईडी, सीबीआई जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग आम बात है और रोजमर्रा की प्रक्रिया बन गई है। पहले कई साथी कहते थे कि चुनाव नवंबर में होगा। मैं कहता था कि अभी तो सीबीआई वाले नोटिस लेकर घर नहीं आए, लगता है चुनाव मार्च-अप्रैल में होगा। अब ईडी वाले मेरे पूर्व ओएसडी के घर पहुंच गए हैं, तो यह उनका तय रूटीन बन गया है। एक तरह से एजेंसियां भाजपा की चुनावी संभावनाओं के लिए टोह लेने वाली टुकड़ी की तरह काम करती हैं।

चुनावी साजिश का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह छापा मेरे घर पर नहीं बल्कि मेरे पूर्व ओएसडी के घर पर पड़ा है। हैरानी की बात है कि लगभग साढ़े 10 साल बाद उन्हें यह मामला याद आया। अगर इसमें कोई अपराध हुआ था तो सरकार पहले कहां सो रही थी? चुनाव के समय ही चुनावी दृष्टि से यह साजिश रची गई है।

हरीश रावत ने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री बना था तो करीब 50-55 हजार पद खाली पड़े थे, उससे पहले युवा नौकरियों के लिए भटक रहे थे, और लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं तक नहीं हो रही थीं। हमारे 3 साल के कार्यकाल में हमने लोक सेवा आयोग की 2 परीक्षाएं कराईं और तीसरी परीक्षा की सारी तैयारी सरकार बदलने से पहले पूरी कर दी।

उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षक नहीं थे, अस्पतालों में डॉक्टर-नर्स नहीं थे, और आईटीआई और पॉलिटेक्निक में अनुदेशकों, समेत कर्मचारियों की कमी से काम ठप था। यह सब देखकर हमने दो फैसले लिए: एक अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन और दूसरा मेडिकल और शिक्षा भर्ती बोर्ड जैसे भर्ती बोर्डों का निर्माण।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी