Aapka Rajasthan

समाज में दूरी पैदा करने वाली फिल्म को इजाजत न दे सेंसर बोर्ड: नसीम सिद्दकी

मुंबई, 6 सितंबर (आईएएनएस)। एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता नसीम सिद्दकी ने 'हनुमान अंश' फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड की आलोचना करते हुए कहा कि समाज में समुदायों के बीच दूरी पैदा करने वाली फिल्मों को इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने इसे महंगाई-बेरोजगारी से ध्यान भटकाने की सरकार की चाल बताया।
 

मुंबई, 6 सितंबर (आईएएनएस)। एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता नसीम सिद्दकी ने 'हनुमान अंश' फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड की आलोचना करते हुए कहा कि समाज में समुदायों के बीच दूरी पैदा करने वाली फिल्मों को इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने इसे महंगाई-बेरोजगारी से ध्यान भटकाने की सरकार की चाल बताया।

हनुमान अंश को लेकर सेंसर बोर्ड की आलोचना करते हुए नसीम सिद्दकी ने कहा, "देश में सेंसर बोर्ड को चाहिए कि ऐसी फिल्मों को दिखाने की इजाजत न दे, जो समाज में लोगों और समुदायों के बीच दूरियां पैदा करता है। हनुमानगढ़ी की फिल्म हो या कोई और, हिंदू राष्ट्र बनाने की कल्पना के बारे में बताया जा रहा है। ये सरकार की चाल है। लोगों का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी और चीनी की बढ़ती कीमतों से हटाने के लिए सरकार हमेशा इस तरह की कभी हनुमान अंश, कश्मीर फाइल्स और केरल फाइल्स जैसी फिल्में बनाती रहती है। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है।"

उन्होंने आगे कहा कि हिंदू धर्म में रामायण और गीता समेत एक से एक श्रेष्ठ किताबें हैं। उसमें राम-सीता चाहे हनुमान, सबके चरित्र वर्णित हैं, इसलिए फिल्मों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने से इतिहास नहीं बदलने वाला है। ये देश के लोगों को भ्रमित करने और मुसलमानों को बदनाम करने की एक साजिश है।

प्रधानमंत्री के होमियोपैथी वाले बयान पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ठीक कह रहे हैं। उन्होंने जो गोली दी है, देश का युवा उसे पचा नहीं पा रहा है। बहुत जल्द आने वाले चुनाव में उस गोली का असर दिखने लगेगा। जेन-जी उन्हीं की गोली खाकर उन्हें उखाड़ फेंकने का काम करेगा।

गरबा कार्यक्रम को लेकर वीएचपी की मांग पर नसीम सिद्दकी ने कहा कि उनकी मांग से मैं बिल्कुल सहमत हूं। मुसलमानों को इजाजत न दी जाए। आधार कार्ड देखने की जरूरत ही नहीं है। सरकार पूरी तरह से कानून बनाए। इस्लाम में वैसे भी नृत्य-संगीत हराम है। अगर हराम काम करने से कोई संस्था उसे रोक रही है तो ये बहुत अच्छा है। जो काम देश के आलिमों को करना चाहिए, वो अगर वीएचपी कर रहा है तो हम उनका स्वागत करते हैं।

सहारनपुर की गैर-कानूनी मस्जिद गिराए जाने को लेकर उन्होंने कहा, "सहारनपुर की मस्जिद देश की आजादी से पहले से मौजूद है। सौ साल से ज्यादा पुरानी मस्जिद है, देश आजाद हुए 80 साल हुए हैं। इस तरीके की एक नहीं अनेकों मस्जिदें हैं। देश आजाद बाद में हुआ, मस्जिदें पहले बनीं। सरकार की जिम्मेदारी है कि मस्जिद की रक्षा करें। मस्जिदों की सुरक्षा का जो कानून बना है, आज उसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।"

उन्होंने कहा कि इसमें स्पष्ट लिखा गया कि 15 अगस्त 1947 से जिस मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर और गुरुद्वारे की जो भी परिस्थिति यहां होगी, उसे कायम रखा जाएगा। लेकिन ये भाजपा की सरकार है तो इससे हम बहुत उम्मीद न रखें। जो लोग भाजपा की तारीफ करते हैं, वो देख लें कि कैसे ये मुसलमानों को टारगेट करते हैं।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी