गुर्जर समाज के आंकड़ों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप, अलग आरक्षण की मांग
जयपुर, 11 अगस्त (आईएएनएस)। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के महासचिव बच्चू सिंह बैंसला ने गुर्जर समुदाय की जातिगत पहचान और आबादी से जुड़े आंकड़ों को कथित तौर पर गलत तरीके से पेश किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने मांग की कि सरकारी दस्तावेजों और रिपोर्टों में समुदाय से जुड़े आंकड़ों की दोबारा समीक्षा कर आवश्यक सुधार किया जाए। साथ ही, उन्होंने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में गुर्जर समाज को अलग से आरक्षण दिए जाने की मांग भी उठाई।
बच्चू सिंह बैंसला ने कहा कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा एक पुरानी संस्था है, जिसका गठन 1908 में हुआ था। यह संगठन देश की आजादी से पहले से समाज के मुद्दों को उठाता रहा है। बैंसला ने राजस्थान की ऐतिहासिक और वीरांगना पन्नाधाय की जाति को लेकर प्रकाशित जानकारी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि 'भारत नारी रत्न' जैसी पुस्तक में पन्नाधाय की जाति को गलत तरीके से प्रकाशित किया गया है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बच्चू सिंह बैंसला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी और असम से गुजरात तक हमारी संस्था 1908 से काम कर रही है। यह संस्था देश की आजादी से पहले की है। संस्था के प्रदेश अध्यक्ष रामप्रसाद धावाई मेरे साथ मौजूद हैं। उन्होंने 28 जनवरी 2023 को भीलवाड़ा के आसींद में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच भी साझा किया था। प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते हमारा ध्यान तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर है। पहला विषय पन्नाधाय माता से जुड़ा है। भारत नारी रत्न पुस्तक में उनकी जाति का गलत उल्लेख किया गया है। ऐसे कई विषय हैं जिन्हें लेकर हम आवाज उठा रहे हैं। आज अखिल भारतीय गुर्जर महासभा की महिला इकाई की कुछ नियुक्तियां भी की जानी थीं और इन्हीं मुद्दों पर चर्चा भी करनी थी।
उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या भारत सरकार को पन्नाधाय माता के विषय की जानकारी नहीं है? देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उनकी प्रतिमा का उद्घाटन कर चुके हैं। राष्ट्रपति, राज्यपाल और देश के बड़े-बड़े प्रशासकों को भी उनके बारे में जानकारी है, फिर भी उनकी जाति का गलत उल्लेख किया गया। क्या इस तथ्य को बताने के लिए भी हमें संघर्ष करना पड़ेगा? इससे बड़ा और गंभीर विषय क्या हो सकता है? ओबीसी आयोग ने हमारी समाज की आबादी 32 लाख बताकर प्रकाशित कर दी, जबकि यह आंकड़ा वास्तविकता से बहुत कम है। मुझे जानकारी मिली है कि अन्य समाजों के साथ भी ऐसा हुआ है। चाहे मेरी कौम के साथ हो या किसी अन्य समाज के साथ, इस प्रकार की गलती स्वीकार्य नहीं है। यह बर्दाश्त से बाहर है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय के दबाव में जल्दबाजी में रिपोर्ट पेश की गई और ऐसी रिपोर्ट तैयार कर दी गई, जिसमें समाजों के आंकड़े गलत दर्शा दिए गए। प्रदेश में गुर्जर समाज की संख्या 80 से 90 लाख के आसपास है, जबकि रिपोर्ट में इसे 32 लाख बताया गया है। एक तरफ आयोग 9 प्रतिशत हिस्सेदारी की बात करता है, जो प्रदेश की आबादी के हिसाब से 80 से 90 लाख लोगों के बराबर बैठती है। वहीं, दूसरी तरफ केवल 32 लाख की संख्या बताई जाती है। यह पूरी तरह से गलत है और इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस प्रकार की त्रुटियां जारी रहीं तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यदि यह जानबूझकर किया जा रहा है तो यह और भी गंभीर मामला है, और यदि जानबूझकर नहीं किया गया तो फिर ऐसे लोगों को ओबीसी आयोग की जिम्मेदारी क्यों दी गई? आयोग के सदस्य और अध्यक्ष ऐसे नहीं होने चाहिए जो समाजों के बारे में गलत आंकड़े प्रस्तुत करें। यह केवल गुर्जर समाज का नहीं, बल्कि हर समाज का गंभीर विषय है। उन्होंने आगे कहा कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव आने वाले हैं। हमारी मांग है कि इन चुनावों में भी हमें अलग से आरक्षण दिया जाए। हम इस मांग को मजबूती के साथ उठाते हैं।
--आईएएनएस
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