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गुमशुदगी के मामलों में बोकारो पुलिस की नाकामी पर झारखंड हाईकोर्ट तल्ख, कहा- सुधरे नहीं हालात तो सीबीआई को सौंपेंगे जांच

रांची, 15 मई (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो से साल 2020 से एक 14 वर्षीय लड़की की गुमशुदगी मामले में बोकारो पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली और कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि आखिर क्या वजह है कि जब भी किसी बच्ची या युवती के लापता होने का मामला आता है, बोकारो पुलिस के हाथ खाली रह जाते हैं।
 
गुमशुदगी के मामलों में बोकारो पुलिस की नाकामी पर झारखंड हाईकोर्ट तल्ख, कहा- सुधरे नहीं हालात तो सीबीआई को सौंपेंगे जांच

रांची, 15 मई (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो से साल 2020 से एक 14 वर्षीय लड़की की गुमशुदगी मामले में बोकारो पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली और कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि आखिर क्या वजह है कि जब भी किसी बच्ची या युवती के लापता होने का मामला आता है, बोकारो पुलिस के हाथ खाली रह जाते हैं।

अदालत ने बोकारो पूर्व और वर्तमान एसपी सहित संबंधित डीएसपी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि अधिकारियों का ध्यान ऐसे संवेदनशील मामलों के खुलासे पर नहीं है। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि पुलिस खुद मान रही है कि यह अपहरण का मामला हो सकता है, तो फिर उस दिशा में ठोस अनुसंधान क्यों नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की अब तक की जांच को असंतोषजनक पाते हुए सीआईडी को तीन सप्ताह के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने कड़े लहजे में चेतावनी दी कि यदि सीआईडी की जांच में भी कोई सुधार नहीं दिखा तो अदालत राज्य की जांच एजेंसियों और सीबीआई को संयुक्त रूप से इस मामले की जांच सौंपने पर विचार कर सकती है।

कोर्ट ने कहा कि साल 2020 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने तीन संदिग्धों का नार्को टेस्ट कराने की बात कही थी, लेकिन उनमें से एक को खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर छोड़ दिया गया। कोर्ट के अनुसार, जब पुलिस कई वर्षों तक बच्ची का सुराग पाने में विफल रही, तो अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अप्रैल 2026 में आनन-फानन में केस सीआईडी को स्थानांतरित कर दिया गया।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जून को तय की गई है, जिस दिन बोकारो की ही एक अन्य 18 वर्षीय युवती के लापता होने से संबंधित याचिका पर भी सुनवाई होनी है। प्रार्थी के अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की ने अदालत को बताया कि पांच साल बीत जाने के बाद भी नाबालिग का कोई पता नहीं चला है। बोकारो के पिंडराजोड़ा थाने में साल 2020 में कांड संख्या 161/20 दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने जिन चार संदिग्धों को पकड़ा था, उन्हें बाद में छोड़ दिया गया। निराश होकर नाबालिग की मां ने अपनी बेटी की तलाश के लिए हाईकोर्ट में गुहार लगाई है, जिस पर अब अदालत ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।

--आईएएनएस

एसएनसी/वीसी