Aapka Rajasthan

गुजरात: वन महोत्सव के दौरान वृक्षारोपण की व्यापक तैयारी, वितरित किए जाएंगे 11 करोड़ से ज्यादा पौधे

गांधीनगर, 13 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात में ग्रीन कवर बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के मकसद से हर साल की तरह इस बार भी वन महोत्सव मनाने की तैयारी की जा रही है। राज्य के सभी जिलों में सरकारी नर्सरियों में बेहतर क्वालिटी के पौधे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि जनभागीदारी के तहत उन्हें वितरित किया जा सके। सरकार की इस पहल से न केवल बड़ी तादाद में प्लांटेशन होता है, बल्कि नेचर कंजर्वेशन में भी मदद मिलती है।
 

गांधीनगर, 13 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात में ग्रीन कवर बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के मकसद से हर साल की तरह इस बार भी वन महोत्सव मनाने की तैयारी की जा रही है। राज्य के सभी जिलों में सरकारी नर्सरियों में बेहतर क्वालिटी के पौधे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि जनभागीदारी के तहत उन्हें वितरित किया जा सके। सरकार की इस पहल से न केवल बड़ी तादाद में प्लांटेशन होता है, बल्कि नेचर कंजर्वेशन में भी मदद मिलती है।

बनासकांठा के स्थानीय निवासी नितिनभाई पटेल ने बताया कि आज पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ती जा रही है। यह बहुत तारीफ की बात है कि गुजरात सरकार पिछले कुछ सालों से पर्यावरण को बचाने के लिए वन महोत्सव का आयोजन कर रही है और पेड़ लगा रही है। धीरे-धीरे लोग इसके प्रति ज्यादा जागरूक हुए हैं।

वन महोत्सव अभियान के दौरान सरकार लोगों को किफायती दामों पर अलग-अलग प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराती है।

डीसा के युवा किसान मयूर ने बताया कि इन सरकारी नर्सरी में बादाम, नीम, नींबू आदि के पौधे दिए जाते हैं और ये सही दाम पर मिलते हैं। मैं सभी से अपील करता हूं कि इसका फायदा उठाएं, और मैं सरकार को भी धन्यवाद देता हूं कि उनका यही मकसद है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य के वन विभाग ने इस साल ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ और वन महोत्सव अभियान के अंतर्गत पूरे राज्य में कुल 74,453 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.51 (5 करोड़ 51 लाख से अधिक) करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा, राज्य की 423 नर्सरियों के माध्यम से करीब 11.80 (11 करोड़ 80 लाख) करोड़ प्लांट डिस्ट्रीब्यूट करने का भी लक्ष्य तय किया गया है।

गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि इन पौधों को चाहे बोडा डूंगर में सड़क किनारे पेड़ लगाने हों या रेवेन्यू एरिया में लगाने हों, जिसमें फॉरेस्ट कवर मॉडल भी शामिल हैं। चाहे लोग पौधे लगाना चाहें, नगर पालिकाओं या नगर निगमों को पौधों की जरूरत हो या वॉलंटरी ऑर्गनाइजेशन को पौधों की जरूरत हो, इन सभी लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में कंट्रोल्ड और तैयार पौधे उपलब्ध हैं।

राज्य में ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने ‘वन कवच’ पहल के जरिए माइक्रो फोरेस्ट विकसित करने का टार्गेट बढ़ा दिया है। यानी चालू वर्ष में 440 हेक्टेयर एरिया में लगभग 300 स्थानों पर वन कवच डेवलप किए जाएंगे।

इसके साथ ही ‘ग्रीन वॉल ऑफ अरावली’ परियोजना के अंतर्गत कुल 6,652 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण करने और 20,100 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव रोपण करने का लक्ष्य भी तय किया गया है। सरकार की इन दूरगामी पहलों का मकसद जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करना, कार्बन सोखने की क्षमता को बढ़ाना और प्राकृतिक इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी