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गुजरात: ‘मिशन मंगलम’ योजना से ग्रामीण महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर, राखी बनाकर कर रहीं लाखों का कारोबार

गांधीनगर, 27 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात के खेड़ा जिले की कठलाल तालुका के पीठाई गांव की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल पेश की है। ये ग्रामीण महिलाएं मीनाबेन डाभी के संतराम सखी मंडल से जुड़ी हैं और राज्य सरकार की मिशन मंगलम योजना के तहत राखी बना रही हैं।
 

गांधीनगर, 27 अगस्‍त (आईएएनएस)। गुजरात के खेड़ा जिले की कठलाल तालुका के पीठाई गांव की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल पेश की है। ये ग्रामीण महिलाएं मीनाबेन डाभी के संतराम सखी मंडल से जुड़ी हैं और राज्य सरकार की मिशन मंगलम योजना के तहत राखी बना रही हैं।

2014 में 10 सदस्यों और 5 हजार रुपए के साथ शुरू हुआ यह सखी मंडल आज न केवल सालाना 10 लाख रुपए की राखी का कारोबार कर रहा है, बल्कि इससे जुड़ी महिलाओं की कमाई भी काफी बढ़ गई है।

संतराम सखी मंडल के प्रमुख मीनाबेन डाभी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि शुरुआत में मेरे साथ संतराम सखी मंडल में 10 बहनें जुड़ी थीं। मैंने उन्हें राखी बनाना सिखाया और फिर हमने राखी बनाने का काम शुरू कर दिया। अब मैं सभी बहनों को घर पर बुलाती हूं और उन्हें राखी बनाना सिखाती हूं। मेरे गृह उद्योग में 45 से ज्यादा बहनें जुड़ गई हैं। आज केवल राखी के कारोबार का मेरा 10 लाख रुपए का टर्नओवर है और जो समय हमारे पास बचता है, उसमें हम पतंगें बनाते हैं।

संतराम सखी मंडल की सदस्‍य प्रतिभा भट्ट ने बताया कि मैं राखियां और पतंगें बनाने में मदद करती हूं। मैंने यहां राखियां बनाई हैं, इसलिए मुझे हर महीने मेहनत के लिए तीन से चार हजार रुपए मिलते हैं। इस राशि से मैं अपने परिवार का गुजारा अच्छे से कर पा रही हूं।

संतराम सखी मंडल की महिलाओं ने इस साल लगभग 5 लाख राखियां बनाई हैं। इन राखियों की डिमांड खेड़ा-नाडियाद के अलावा गुजरात के दूसरे शहरों में भी है। खरीदारों के मुताबिक इन राखियों की डिजाइन बहुत अलग है, साथ ही ये बेहद सुंदर और सस्ती भी हैं।

ग्राहक गीताबेन पटेल ने बताया कि वे राखियां बहुत अच्छी हैं। घर पर बनी राखियां बेहद सुंदर हैं और लोगों के लिए थोड़ी सस्ती भी हैं। वहीं, एक अन्‍य ग्राहक इच्छाबेन ने कहा कि यहां रुद्राक्ष वाली राखियां हैं, गणपति वाली राखियां हैं, और सभी राखियां बहुत अच्छी और सुंदर हैं। यहां इतने ज्यादा डिजाइन हैं कि कंफ्यूजन हो जाता है कि कौन सी खरीदें। यहां वाकई बहुत खूबसूरत राखियां हैं।

अहमदाबाद के होलसेल ग्राहक दर्शन सिंह डाभी ने बताया कि यहां राखियां खरीदने आया हूं। मैं यहां कम से कम तीन-चार साल से आ रहा हूं। ये बहनें अपने हाथ से बहुत ही सुंदर राखियां बनाती हैं, मैं 10-15 हजार रुपए की राखियां ले जाऊंगा।

सखी मंडल की महिलाएं ऑनलाइन भी राखी बेची रही हैं, यानी इस रक्षाबंधन पर पीठाई गांव की राखियां देश-विदेश में धूम मचा रही हैं। सखी मंडल की सदस्य राखियों के अलावा पतंगें भी बनाती हैं, साथ ही पशुपालन जैसे कार्यों में परिवार का हाथ बंटाती हैं। कभी दूसरों पर निर्भर रहने वाली ये महिलाएं सरकार की मिशन मंगलम स्कीम का लाभ उठाकर आज न केवल वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, बल्कि अपने परिवार का संबल भी बन गई हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/एमएस