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गुजरात में तालाब गहरे होने से किसानों के खिले चेहरे, 500 से अधिक हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा सिंचाई का पानी

अहमदाबाद, 27 मई (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने राज्य के जल संसाधन और सिंचाई ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सीएम भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में जल संसाधन विभाग ने पिछले तीन वर्षों, यानी 2022-23 से 2024-25 के दौरान राज्यभर में जलाशयों, नहरों, नदियों और अन्य जल निकायों से 221 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक गाद हटाने का कार्य पूरा किया है। यह आंकड़ा निर्धारित लक्ष्य 203 लाख क्यूबिक मीटर से भी अधिक है।
 
गुजरात में तालाब गहरे होने से किसानों के खिले चेहरे, 500 से अधिक हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा सिंचाई का पानी

अहमदाबाद, 27 मई (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने राज्य के जल संसाधन और सिंचाई ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सीएम भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में जल संसाधन विभाग ने पिछले तीन वर्षों, यानी 2022-23 से 2024-25 के दौरान राज्यभर में जलाशयों, नहरों, नदियों और अन्य जल निकायों से 221 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक गाद हटाने का कार्य पूरा किया है। यह आंकड़ा निर्धारित लक्ष्य 203 लाख क्यूबिक मीटर से भी अधिक है।

राज्य सरकार द्वारा चलाए गए इस व्यापक अभियान के तहत गाद और अवांछित वनस्पतियों को हटाकर जल संरक्षण क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान राज्य की 1,474 विभिन्न साइट्स पर कार्य किया गया। औसतन 88 से 96 भारी मशीनों की मदद से लगभग 4,223 किलोमीटर लंबाई में संरचनात्मक सुधार और सफाई अभियान चलाया गया।

जल संसाधन एवं जल आपूर्ति मंत्री ईश्वरभाई पटेल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "पिछले तीन वर्षों में लगभग 123 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में सफाई और गहरीकरण का कार्य किया गया है। सरकार का उद्देश्य राज्य में जल संरक्षण क्षमता को बढ़ाना और सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।"

इसी अभियान के तहत सौराष्ट्र क्षेत्र के जूनागढ़ जिले की मानावदर तालुका में दगड़ और जांबुडा झीलों को जोड़कर एक बड़ा तालाब विकसित किया जा रहा है। लगभग 6.5 करोड़ रुपए की लागत से चल रहे इस प्रोजेक्ट का काम तेजी से जारी है। इस परियोजना से उन्हें सिंचाई और पेयजल की बेहतर सुविधा मिलेगी।

किसान रमेश बरारिया ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बताया, "पिछले डेढ़ महीने से तालाब को गहरा करने का काम लगातार जारी है। इसके लिए हिताची मशीनों और डंपरों की मदद ली जा रही है। चेक डैम की ऊंचाई भी बढ़ाई जा रही है, जिससे पहले की तुलना में तीन गुना अधिक पानी संग्रहित किया जा सकेगा।"

एक अन्य किसान प्रवीण विरदा ने कहा कि तालाब गहरा होने से उनके खेतों तक पानी पहुंचेगा, जो लगभग तीन से साढ़े तीन किलोमीटर दूर स्थित हैं। किसान लंबे समय से इस मांग को उठा रहे थे। अब सरकार द्वारा इस दिशा में कदम उठाने से क्षेत्र के किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से तालाब की जल भंडारण क्षमता में दो से तीन गुना तक वृद्धि होगी। इससे माणावदर शहर और आसपास के पांच से छह गांवों को सीधा लाभ मिलेगा, जबकि करीब 500 से 600 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।

सिंचाई विभाग के डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एम एल खंभाला ने बताया कि पहले तालाब की जल संग्रह क्षमता लगभग 20 मिलियन क्यूबिक फीट थी, लेकिन मरम्मत और वेस्ट वीयर की ऊंचाई बढ़ाने के बाद इसमें उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

गुजरात सरकार ‘सुजलाम सुफलाम योजना’ और ‘कैच द रेन’ जैसे अभियानों के माध्यम से राज्य में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इन पहलों से भूजल स्तर में सुधार हुआ है और किसानों को सिंचाई के लिए अधिक पानी उपलब्ध हो रहा है।

--आईएएनएस

एसएके/डीकेपी