गुजरात में 47 फॉरेंसिक वैन कार्यरत, क्राइम सीन पर ‘ऑन द स्पॉट’ प्राथमिक परीक्षण करने के लिए तैयार
गांधीनगर, 2 जुलाई (आईएएनएस)। जब पुलिस किसी भी अपराध की जांच करती है, तब यह आवश्यक है कि सबूत समय पर इकट्ठा किए जाएं और साथ ही यह भी आवश्यक है कि उनमें किसी भी प्रकार की मिलावट या अशुद्धिकरण (कंटेमिनेशन), यानी छेड़छाड़ न हो। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए गुजरात में 47 मोबाइल फॉरेंसिक वैन (एमएफवी) पुलिस जांच में सहयोग के लिए कार्यरत हैं। ये फॉरेंसिक वैन यह सुनिश्चित करती हैं कि अपराध स्थल पर सबूतों को जल्द से जल्द सुरक्षित रखा जाए, उनकी प्राथमिक जांच समय पर हो जाए तथा शुरुआती फॉरेंसिक राय मिल जाए, ताकि त्वरित पुलिस जांच में मदद मिल सके।
राज्य में फॉरेंसिक विज्ञान का दायरा बढ़ाने के लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूरदर्शी सोच के साथ गुजरात फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (जीएसएफयू) की स्थापना की थी, जिसे अब केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया है। पुलिस के कामकाज और कानून व्यवस्था बनाए रखने में फॉरेंसिक विज्ञान का व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उनके विजनरी मार्गदर्शन में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में समयानुकूल नए आपराधिक कानून लागू किए गए हैं। नए आपराधिक कानूनों में दोषसिद्धि दर (सजा की दर) को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से अपराधों की जांच को विशेष महत्व दिया गया है। इन कानूनों के लागू होने से 7 साल से अधिक की सजा के प्रावधान वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य बना दिया गया है, ऐसे में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका और भी बढ़ गई है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल प्रधानमंत्री के विजन को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, वर्ष 2024 में 47 में से 28 मोबाइल फॉरेंसिक वैन (एमएफवी) को अपग्रेड किया गया। गत दो वर्षों में एमएफवी 37,269 क्राइम सीन/स्पॉट पर पहुंची हैं। एमएफवी ने हत्या, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो), लूट, चोरी, आगजनी और नारकोटिक्स सहित अन्य महत्वपूर्ण अपराधों के मामलों में घटनास्थल पर सहायता प्रदान की है।
अलग-अलग क्राइम सीन यानी घटनास्थलों के दौरों में मिले अपराधवार आंकड़ें इस प्रकार हैं: हत्या (1529), बलात्कार/पॉक्सो/बच्चों के साथ दुर्व्यवहार (3746), हत्या का प्रयास (1583), लूट (728), सेंधमारी/चोरी (2758), गोलीबारी (154), विस्फोट (43), आगजनी (92893), नारकोटिक्स (1968) और फेटल-जानलेवा मामले (9022)। इसके अलावा, 10,457 अन्य घटनास्थल के दौरों में आकस्मिक मौत, हिरासत में मौत, अप्राकृतिक मौत, संदिग्ध घटनाओं और दूसरी कानून व्यवस्था से जुड़ी फॉरेंसिक जांच शामिल हैं।
इन मोबाइल फॉरेंसिक वैनों में 12 विशेष वैज्ञानिक किट उपलब्ध हैं। जिनमें डीएनए और सेक्सुअल असॉल्ट से जुड़े सबूतों की किट, नारकोटिक्स स्क्रीनिंग किट, एक्सप्लोसिव स्क्रीनिंग किट, गन शॉट रेसिड्यू किट, आगजनी की जांच के लिए किट, फुट प्रिंट और टायर प्रिंट कास्टिंग किट सहित अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।
इन वाहनों में स्टीरियो माइक्रोस्कोप, डीएसएलआर कैमरा, जीपीएस वाले बॉडी-वॉर्न कैमरा सिस्टम, लैपटॉप और प्रिंटर, मिनी रेफ्रिजरेटर, एलईडी स्क्रीन, हाई इंटेंसिटी फॉरेंसिक लाइट सोर्स, जनरेटर सेट और अन्य आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध हैं। इन उपकरणों की मदद से अपराध स्थल पर ही विभिन्न सबूतों जैसे खून के धब्बे और अन्य जैविक नमूने, फिंगरप्रिंट्स, पैरों और टायर के निशान, गन शॉट रेसिड्यू, नारकोटिक्स पदार्थ, विस्फोटक अवशेष, जली हुई सामग्री, बाल, फाइबर, मिट्टी के नमूने और कांच के टुकड़े सहित अन्य सूक्ष्म सबूतों की शुरुआती जांच की जा सकती है।
मोबाइल फॉरेंसिक वैन का मुख्य उद्देश्य अपराध स्थल पर तत्काल वैज्ञानिक सहायता देना, सबूतों को उचित तरीके से सुरक्षित रखना, सबूत दूषित होने की संभावना को कम करना और क्राइम सीन का रिकंस्ट्रक्शन करना है। विशेषकर, बलात्कार और पॉक्सो के मामलों में जैविक सबूतों की समय पर पहचान करना और सबूतों को इकट्ठा करना महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में इस वैन की भूमिका काफी अहम हो जाती है। बॉडी कैमरा, डीएसएलआर फोटोग्राफी और सीसीटीवी आधारित दस्तावेजीकरण के कारण क्राइम सीन का वैज्ञानिक तरीके से अवलोकन भी अधिक प्रभावी हो गया है।
आज, आपराधिक जांच वैज्ञानिक सबूतों पर अधिक से अधिक निर्भर हो रही है, इसलिए गुजरात में मोबाइल फॉरेंसिक वैन अपराधों की जांच-पड़ताल करने के तरीके को बदल रहे हैं। इस प्रकार, फॉरेंसिक विज्ञान सीधे घटनास्थल पर पहुंचता है, अहम सबूतों को सुरक्षित रखता है और फर्स्ट रिस्पॉन्स से लेकर अंतिम निर्णय आने तक मजबूत केस बनाने में मदद करता है।
--आईएएनएस
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