गुजरात: डीसा में बनने वाले 'ड्राइव थ्रू नाइट सफारी और जूलॉजिकल पार्क' को सेंट्रल जू अथॉरिटी की मंजूरी
गांधीनगर, 12 अगस्त (आईएएनएस)। बनासकांठा जिले के डीसा में बन रहे एशिया के प्रथम 'डेजर्ट थीम' जूलॉजिकल पार्क आधारित डिजाइन की गई ‘ड्राइव थ्रू नाइट सफारी’ को सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) की ओर से मंजूरी मिल गई है। गुजरात वन विभाग द्वारा विकसित की जा रही इस परियोजना का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण तथा इको-टूरिज्म को प्रोत्साहन देना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जंगलों तथा वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अनेक पहलें की हैं। प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा है कि प्रकृति एवं वन्यजीवों का संरक्षण भारत की संस्कृति तथा परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार राज्यभर में वन्यजीव संरक्षण की अनेक परियोजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है, जिसमें डीसा में प्रस्तावित डेजर्ट-थीम आधारित जूलॉजिकल पार्क भी शामिल है।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा, ''प्रस्तावित डीसा ‘डेजर्ट जूलॉजिकल पार्क तथा नाइट सफारी’ जूना (पुराने) डीसा में लगभग 103 हेक्टेयर क्षेत्र में बनेगी। यह परियोजना सेंट्रल जू अथॉरिटी के दिशानिर्देश के अनुसार तैयार होती है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 542.14 करोड़ रुपए है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब सेंट्रल जू अथॉरिटी की ओर से मंजूरी मिल गई है।”
उल्लेखनीय है कि वन एवं पर्यावरण विभाग के राज्य मंत्री प्रवीण माली के विधानसभा क्षेत्र में यह परियोजना आकार ले रही है और यह जूलॉजिकल पार्क उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है।
प्रवीण माली ने कहा, ''इस प्राणी संग्रहालय को एक आधुनिक संरक्षण सुविधा के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें लगभग 83 प्रजातियों के करीब 2700 देशी एवं विदेशी पशु-पक्षियों को रखा जाएगा। यह परियोजना आगंतुकों को वन्यजीवों के अनूठे अनुभवों के साथ-साथ संरक्षण, प्रजनन, वन्यजीव रेस्क्यू, पुनर्वास, पर्यावरणीय शिक्षा और प्रकृति के वैज्ञानिक अर्थघटन के एक केंद्र के रूप में भी काम करेगी। डीसा में बन रहा यह जू एशिया का पहला डेजर्ट थीम आधारित जू होगा। यह विश्व का इस प्रकार का तीसरा डेजर्ट-थीम जू होगा और विश्व का चौथा नाइट सफारी जू बनेगा।''
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा, ''इस परियोजना का मुख्य आकर्षण इसकी विश्व स्तरीय नाइट सफारी होगी, जहाँ आगंतुक सूर्यास्त के बाद विशेष रूप से डिजाइन किए गए एन्क्लोजर में निशाचर प्राणियों को देख सकेंगे। इस परियोजना में एक अलग ‘डे जू’ (दिन का प्राणी संग्रहालय) और नाइट सफारी के लिए पाँच समर्पित एन्क्लोजर होंगे। यह परियोजना उत्तर गुजरात के टूरिज्म सर्किट के लिए महत्वपूर्ण स्थान बनेगी,” श्री प्रवीण माली ने आगे कहा।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन डॉ. जयपाल सिंह ने कहा, ''इस प्राणी संग्रहालय में चिंकारा, काला हिरण, भारतीय घुड़खर (जंगली गधा), एशियाटिक सिंह और तेंदुए जैसे प्राणियों को रखा जाएगा।''
उन्होंने आगे बताया, ''प्राणी संग्रहालय में अलग-अलग प्रजातियों के प्राणियों के लिए अलग-अलग एन्क्लोजर, पक्षीघर, सरीसृप घर, बटरफ्लाई पार्क, इंटरप्रिटेशन सेंटर, फूड कोर्ट, सॉवेनियर शॉप, गोल्फ कार्ट सेवा और आगंतुकों के लिए अन्य सुविधाएँ भी होंगी।''
गांधीनगर वाइल्डलाइफ सर्कल की मुख्य वन संरक्षक आराधना साहू ने कहा, ''पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए इस परियोजना में वर्षाजल संचयन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, सोलर एनर्जी, स्थानीय वनस्पतियों का रोपण और ग्रीन बफर जोन जैसी ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा।''
बनासकांठा वाइल्डलाइफ डिवीजन के उप वन संरक्षक पोपटराव गारडी के अनुसार, ''वडनगर, अंबाजी और नडाबेट जैसे पर्यटन स्थलों के साथ यह प्राणी संग्रहालय भी एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण बनेगा। इसके अलावा, यह जू वन्यजीव संरक्षण एवं इको-टूरिज्म के लिए एक फ्लैगशिप डेस्टिनेशन बनेगा।''
इस प्राणी संग्रहालय में भारतीय मरुस्थल (रण/रेगिस्तान) के साही, खरगोश, सेही, डेजर्ट हेयर, भारतीय घुड़खर, भालू, कैराकल, भारतीय भेड़िया, सियार, लकड़बग्घा और भारतीय रेगिस्तानी लोमड़ी जैसे प्राणियों को रखा जाएगा। इसके अलावा परियोजना के अन्य मुख्य आकर्षणों में रेप्टाइल सफारी, रेन फॉरेस्ट बायोम और एक्वेरियम भी शामिल हैं।
अफ्रीकी रेगिस्तान के जानवर मुख्य आकर्षण होंगे। इनमें अंगोलन जिराफ, ग्रेवीज ज़ेब्रा, सिमिटार ओरिक्स, अफ्रीकन कुडू, स्प्रिंगबोक, अड्रा गजेल, ब्लैक राइनोसॉरस, चिंपैंजी, मीरकैट, अफ्रीकी चीता, अफ्रीकी शेर, फेनेक फॉक्स, बैट-इयर्ड फॉक्स और शुतुरमुर्ग शामिल हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियाई रेगिस्तान के कंगारू, एमू और वॉलाबी भी जैसे प्राणी भी आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
--आईएएनएस
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