गुजरात: सीएम भूपेंद्र पटेल ने साइंस सिटी में कॉकलियर इंप्लांट प्रोग्राम के लाभार्थी बच्चों के साथ किया संवाद
गांधीनगर, 23 मई (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शनिवार को अहमदाबाद की साइंस सिटी में राज्य सरकार के कॉकलियर इंप्लांट एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर रिप्लेसमेंट प्रोग्राम का लाभ उठाने वाले 20 बच्चों के साथ सहज संवाद किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक आत्मीय बुजुर्ग और अभिभावक के रूप में बच्चों के साथ अपनापन दिखाया। इससे बच्चों के चेहरे मुस्कान से खिल उठे। आवाज मिलने के बाद मुख्यमंत्री के साथ बात करने का अवसर मिलने पर बच्चे खुशी से चहक उठे।
संवाद के दौरान बच्चों के अभिभावकों ने महंगे इंप्लांट बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार तथा इस योजना के सुनियोजित कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) टीम, सरकार के स्वास्थ्य विभाग तथा सोला सिविल सहित अन्य हॉस्पिटलों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बच्चों के साथ साइंस सिटी की प्रसिद्ध ‘एक्वाटिक गैलरी’ का दौरा किया। सीएम ने रंगबिरंगी मछलियों और जलचर सृष्टि को हैरानी से देख रहे बच्चों का उत्साह बढ़ाया और उनके साथ बाल सहज बातें करके वात्सल्यभाव अभिव्यक्त किया। मुख्यमंत्री की इस संवेदनशीलता को देखकर वहां मौजूद बच्चों के माता-पिता और अधिकारियों की आंखें भी हर्ष से भीग उठीं।
मुख्यमंत्री ने सभी अभिभावकों और उपस्थित लोगों से अनुरोध किया कि यदि अभी भी समाज में ऐसे जरूरतमंद बच्चे हों, तो ऐसे बच्चों और उनके परिवारों को इस योजना का लाभ दिलाने के लिए मार्गदर्शन दें।
इस अवसर पर खाद्य एवं औषधि आयुक्त डॉ. रतनकंवर गढ़वी चारण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पी. भारती विशेष रूप से मौजूद रहे।
इस दौरान बच्चों के अभिभावकों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी। अभिभावक सोनलबेन भावसार ने कहा कि विवाह के 13 वर्षों के बाद भगवान ने मुझे संतान सुख दिया, लेकिन जब पता चला कि बच्चा बोल-सुन नहीं सकता, तब मैं टूट गई थी। आंगनबाड़ी के दौरे के दौरान आरबीएसके की टीम ने मेरे बच्चे की जांच की और असारवा सिविल हॉस्पिटल में मुफ्त ऑपरेशन कराया। इस सरकारी योजना ने हमारी बहुत बड़ी आर्थिक और मानसिक मदद की है। आज जिस प्रकार से मुख्यमंत्री ने एक अभिभावक बनकर हमारे बच्चों के साथ बातचीत की और बच्चों के साथ घूमें, वह देखकर हमें भरोसा हो गया है कि राज्य के एक बड़े-बुजुर्ग के रूप में मुख्यमंत्री सदैव हमारे साथ खड़े हैं।
वहीं, अभिभावक ऋतुल पंचाल ने कहा कि तीन वर्ष पहले जब यह मालूम हुआ कि हमारी बेटी रूही दोनों कानों से सुन नहीं सकती, तो हम चिंता डूब गए। महंगे उपचार के कारण अनेक हॉस्पिटलों में जाने के बाद हमें सोला सिविल हॉस्पिटल में राज्य सरकार की निःशुल्क कॉकलियर इंप्लांट ऑपरेशन की स्कीम के बारे में पता चला। सोला सिविल के ईएनटी और ऑडियोलॉजी विभाग के उत्कृष्ट मार्गदर्शन के अंतर्गत बेटी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हो गई और वहां एक वर्ष तक चली स्पीच थेरेपी के कारण आज रूही इतनी अच्छी बातें करती है कि मानों उसे कोई समस्या ही नहीं थी। हमने उसकी स्कूलिंग और सामाजिक मेलमिलाप भी बढ़ा दिया है, ताकि वह बिना किसी हीन भावना के सभी के बीच सहजता से रह सके।
कॉकलियर इंप्लांट अत्यंत महंगी सर्जरी होने के कारण साधारण परिवारों के लिए इसका खर्च उठाना असंभव होता है, लेकिन यह उम्दा स्कीम लाकर सरकार ने हजारों बच्चों को नवजीवन दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्वयं व्यक्तिगत रूप से आकर इन बच्चों से भेंट की और एक अभिभावक के रूप में उन पर जो स्नेह बरसाया, वह सचमुच ही प्रेरणादायी है। मैं बच्चों को प्रोत्साहित करने और संपूर्ण समर्थन देने के लिए मुख्यमंत्री और गुजरात सरकार का हृदयपूर्वक आभार व्यक्त करती हूं।
जैनम शाह ने कहा कि जब मेरी बेटी हाश्वी डेढ़ वर्ष की हुई, तब उसके कान की समस्या के बारे में पता चलने पर हमें गहरा धक्का लगा। सोला सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टरों के अद्भुत सहयोग से हमने उसका कॉकलियर इंप्लांट ऑपरेशन करवाया। वहां दी गई स्पीच थेरेपी के कारण केवल हमारी बेटी आठ महीने में ही बहुत ही अच्छे से बोलने लगी। एक कान के उपचार के सफल परिणाम से प्रेरित होकर हमने सोला सिविल में ही उसके दूसरे कान का ऑपरेशन भी करवाया। आज ऑपरेशन के डेढ़ वर्ष के बाद साढ़े तीन वर्ष की मेरी बेटी सामान्य बच्चों की तरह एक सामान्य स्कूल में पढ़ती है और एक सामान्य जीवन जी रही है।
उन्होंने आगे कहा कि मैं उन सभी पैरेन्ट्स से कहना चाहूंगी, जो हिचकिचा रहे हैं, कि बिना किसी चिंता के कॉकलियर इंप्लांट स्कीम का लाभ उठाएं, यह सरकारी योजना ऐसे बच्चों के लिए एक वरदान की तरह है।
कॉकलियर इंप्लांट एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर रिप्लेसमेंट प्रोग्राम गुजरात सरकार द्वारा 6 वर्ष तक की उम्र के संपूर्ण बहरेपन से पीड़ित मासूम बच्चों का बिल्कुल मुफ्त कॉकलियर इंप्लांट करवाने का प्रोग्राम है। यह उम्दा सेवा यज्ञ वर्ष 2014 से ‘शाला आरोग्य कार्यक्रम’ के अंतर्गत शुरू किया गया है, जिसके तहत अब तक 3500 से अधिक बच्चों का कॉकलियर इंप्लांट हो चुका है।
राज्य के बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही यह अत्याधुनिक उपचार सुलभ कराने के लिए गुजरात के 10 प्रतिष्ठित हॉस्पिटलों में यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। वर्ष 2024 में राज्य सरकार ने एक संवेदनशील निर्णय लिया, जिसके अंतर्गत जिन बच्चों के एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर खराब हो गए हैं, टूट गए हैं या गुम हो गए हैं, ऐसे बच्चों के लिए स्पीच प्रोसेसर को एक बार बिल्कुल मुफ्त रिप्लेस कर दिया जाएगा।
अब तक 401 बच्चों के एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर रिप्लेस किए जा चुके हैं। बाजार में एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर की अनुमानित कीमत लगभग 3.5 लाख रुपए होती है, जिसे वहन करना मध्यम या गरीब वर्ग के परिवारों के लिए संभव नहीं होता।
इस पूरे प्रोग्राम को और मजबूत और परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए विशेषज्ञ ईएनटी सर्जन, ऑडियोलॉजिस्ट (जो ऑपरेशन से पहले जांच और ऑपरेशन के बाद मैपिंग का काम करते हैं) तथा स्पीच लैंग्वेज थेरापिस्ट (जो बच्चों को सुनना और बोलना सिखाते हैं) दिन-रात सेवारत रहते हैं।
कॉकलियर इंप्लांट ऑपरेशन के मुख्य दो हिस्से होते हैं- इंटरनल इंप्लांट और एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर। प्रोसेसर बाहर की आवाज को अंदर के इलेक्ट्रॉनिक हिस्से (जो कान में प्रत्यारोपित किया गया हो) तक पहुंचाता है, जहां से इलेक्ट्रिकल सिग्नल को आंतरिक कान (कॉक्लिया) से लेकर दिमाग के केंद्र तक पहुंचाया जाता है। चूंकि एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, इसलिए समय के साथ रोजाना के घिसाव, नमी, बैटरी की कम होती कार्यक्षमता, केबल को होने वाले नुकसान या तार में शॉर्ट सर्किट होने के कारण खराब होने की संभावना रहती है। स्पीच प्रोसेसर का जीवनकाल लगभग 10 वर्ष होता है, समय के साथ इसे अपग्रेड करना या बदलना पड़ता है।
--आईएएनएस
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