गुजरात : अब राज्य के सभी आदिजाति क्षेत्रों के आईसीडीएस ब्लॉक में पहुंची ‘दूध संजीवनी योजना’
गांधीनगर, 17 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात के आदिजाति और दूरस्थ क्षेत्रों में कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने ‘दूध संजीवनी योजना’ के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के आदिजाति क्षेत्रों के लोगों और विशेषकर कमजोर वर्ग के लोगों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार प्रयासरत मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय के साथ ही कुपोषण विरोधी लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली दूध संजीवनी योजना अब राज्य के सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों में लागू हो गई है।
राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस संबंध में एक प्रस्ताव किया है, जिसके अंतर्गत आदिजाति जिलों में शेष सभी 53 आईसीडीएस ब्लॉकों में दूध संजीवनी योजना का विस्तार करने की मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही; पहली बार योजना के लाभार्थियों के लिए हाई-फैट फोर्टिफाइड दूध के पायलट प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दी गई है। परिणामस्वरूप अब आदिवासी क्षेत्रों के अधिक बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक अधिक पौष्टिक और पोषणयुक्त दूध पहुँचेगा।
उल्लेखनीय है कि दूध संजीवनी योजना की शुरुआत 24 दिसंबर, 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री तथा वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केवल 6 आदिजाति जिलों में प्रायोगिक रूप से की गई थी। इसके अंतर्गत लाभार्थियों को 200 मिलीलीटर फोर्टिफाइड फ्लेवर्ड दूध दिया जाता है।
5 वर्षों में 6 से 20 जिलों तक पहुंची योजना
आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों तथा गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को नियमित रूप से फोर्टिफाइड दूध देकर कुपोषण की दर कम करने के मुख्य उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के सकारात्मक परिणामों को ध्यान में रखते हुए योजना का लगातार विस्तार होता रहा और 5 वर्षों में योजना 6 से 20 जिलों तक पहुंच गई। योजना के अंतर्गत वर्ष 2014 में अतिरिक्त 14 आदिजाति जिलों के 106 आईसीडीएस घटकों तथा 20 विकासशील तालुकाओं को शामिल किया गया। वर्ष 2016 से इस योजना में सहकारी डेयरी क्षेत्र को भी जोड़ा गया और बनास, अमूल, सुमुल, माही सहित राज्य की विभिन्न सहकारी डेयरियों द्वारा फोर्टिफाइड दूध का उत्पादन और आपूर्ति शुरू की गई। इस सहयोग के कारण योजना और अधिक सुव्यवस्थित तथा प्रभावी बनी।
वर्तमान में दूध संजीवनी योजना मुख्य रूप से राज्य के 20 जिलों बनासकांठा, साबरकांठा, अरवल्ली, महीसागर, पंचमहाल, दाहोद, छोटा उदेपुर, नर्मदा, भरूच, सूरत, तापी, नवसारी, वलसाड और डांग जैसे प्रमुख आदिजाति बहुल जिलों के अलावा कच्छ, देवभूमि द्वारका, पाटण, खेडा, जामनगर और बोटाद के चयनित विकासशील क्षेत्रों में लागू थी, लेकिन अभी भी 53 आईसीडीएस ब्लॉकों में योजना लागू नहीं थी।
शेष 53 आईसीडीएस ब्लॉकों के समावेश और फैट बढ़ाने को मंजूरी
इस दौरान आईसीडीएस आयुक्त के कार्यालय द्वारा योजना के अंतर्गत शेष 53 आईसीडीएस ब्लॉकों को शामिल करने तथा लाभार्थियों को दिए जाने वाले दूध में फैट की मात्रा 4.5 प्रतिशत (9 ग्राम) करने का प्रस्ताव किया गया। इस प्रस्ताव पर कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रस्ताव जारी कर शेष 53 आईसीडीएस ब्लॉकों में दूध संजीवनी योजना लागू करने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही; यह योजना अब राज्य के सभी आईसीडीएस ब्लॉकों में लागू हो गई है। राज्य सरकार के 100 प्रतिशत व्यय पर 53 आईसीडीएस ब्लॉकों में दूध संजीवनी योजना शुरू करने के निर्णय से हजारों नए लाभार्थी बच्चे और माताएं योजना के दायरे में आएंगे तथा आदिजाति क्षेत्रों में पोषण की समान उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
इतना ही नहीं; प्रस्ताव के अनुसार अब योजना में दूध की गुणवत्ता का भी नया मानदंड जोड़ा गया है। अब तक दिए जाने वाले फोर्टिफाइड दूध में 1.5 प्रतिशत फैट था। अब चयनित जिलों में अधिक वसा युक्त दूध देने का पायलट शुरू करने का निर्णय किया गया है। इसके अंतर्गत नर्मदा, दाहोद और डांग जिलों में 3 प्रतिशत फैट वाला दूध दिया जाएगा; जबकि वलसाड और साबरकांठा जिलों में 4.5 प्रतिशत फैट वाला दूध दिया जाएगा। यह अतिरिक्त फैट बच्चों के शारीरिक विकास, ऊर्जा तथा पोषण की आवश्यकताओं को अधिक बेहतर तरीके से पूरा करने में सहायक होगा।
38.0125 करोड़ रुपए के प्रावधान के साथ पारदर्शिता पर बल
राज्य सरकार ने इस विस्तार के लिए लगभग रु. 37.709 करोड़ का प्रावधान किया है, जबकि हाई-फैट पायलट प्रोजेक्ट के लिए अलग से रु. 0.3035 करोड़ मंजूर किए गए हैं। यह व्यय पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनी रहे; इसके लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन बनाया जाएगा, आवश्यक खरीद जीईएम पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, वित्तीय सहायता डीबीटी पद्धति से दी जाएगी तथा समय-समय पर सोशल ऑडिट और थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन भी अनिवार्य रहेगा। इससे योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक प्रभावी रूप से पहुँचे; यह सुनिश्चित होगा।
इस प्रकार; गुजरात सरकार की दूध संजीवनी योजना केवल दूध वितरण की योजना नहीं है, बल्कि गुजरात की आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य में किया जाने वाला एक दीर्घकालिक निवेश है। कुपोषण के खिलाफ लड़ाई, माता और बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार, आदिजाति क्षेत्रों में पोषण की समान अवसर उपलब्धता तथा सहकारी डेयरी व्यवस्था के सफल उपयोग; इन सभी बातों को एक साथ जोड़ने वाली यह योजना अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। शेष सभी आईसीडीएस ब्लॉकों तक विस्तार तथा हाई-फैट दूध के प्रयोग के साथ गुजरात सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य के किसी भी बच्चे का भविष्य पोषण के अभाव में कमजोर न पड़े; इसके लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।
--आईएएनएस
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