जीएसटी परिषद के फैसलों से एमएसएमई को बड़ी राहत, घटेगा नोटिस और पेनाल्टी का बोझ
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। जीएसटी काउंसिल की हालिया बैठक में लिए गए फैसलों को छोटे और मझोले कारोबारियों (एमएसएमई) के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन फैसलों से कानून की अनिश्चितता, टैक्स नोटिस, पेनाल्टी और मुकदमेबाजी का डर काफी हद तक कम होगा और व्यापार करने में आसानी बढ़ेगी।
आईएएनएस से बातचीत में सीए नीतीश कुमार ने कहा कि इस बार काउंसिल का प्रमुख फोकस एमएसएमई और छोटे व्यापारियों पर ही रहा है। उन्होंने कहा, "नोटिसों को सरल प्रारूप में लाने की कोशिश की गई है। पेनाल्टी को 25 हजार रुपए से घटाकर न्यूनतम 10 हजार रुपए कर दिया गया है। 10 हजार रुपए से नीचे अब कारण बताओ नोटिस का कोई प्रावधान नहीं होगा। इससे छोटे कारोबारियों को राहत मिली है और उन्हें लगेगा कि छोटी-मोटी गलतियों के लिए अब जीएसटी अधिकारी उन्हें परेशान नहीं कर सकेंगे।"
रिफंड प्रक्रिया में तेजी को लेकर पूछे गए सवाल पर सीए नीतीश ने कहा कि यह वर्किंग कैपिटल के लिहाज से सबसे अहम फैसला है। अब रिफंड एप्लीकेशन लगाते ही 90 प्रतिशत प्रोविजनल रिफंड मिल जाएगा। पहले रिफंड में ज्यादा दिन लगते थे, लेकिन अब 10 दिन के अंदर पावती को ऑटो-डीम्ड मान लिया जाएगा। कैश लेजर रिफंड में अधिकारियों के हस्तक्षेप को खत्म कर दिया गया है। सिस्टम जेनरेटेड फ्लैग्स को पार करते ही रिफंड ऑटोमैटिक लेजर में आ जाएगा, जिससे व्यापारियों की कार्यशील पूंजी नहीं फंसेगी।
कानूनी बोझ और व्यापार सुगमता पर उन्होंने कहा, "सबसे कठोर प्रावधान गिरफ्तारी की शक्ति थी। धारा 69 के तहत जो पावर ऑफ अरेस्ट थी, उसे हटाने की सिफारिश की गई है। इससे सरकार का स्व-मूल्यांकन तंत्र पर भरोसा दिखता है। जब व्यापारी का सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा तो सकारात्मक माहौल बनेगा और वह अपने कारोबार को और बढ़ा सकेगा, जो 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को गति देगा। कुल मिलाकर यह फैसला एक पारदर्शी, कुशल और व्यापार-अनुकूल कर व्यवस्था बनाएगा।"
वहीं उत्तर भारत क्षेत्रीय परिषद के सदस्य सीए रत्न सिंह यादव ने कहा कि जीएसटी अधिकारियों के पास गिरफ्तारी की शक्ति होने से कारोबारियों और प्रोफेशनल्स में हमेशा डर बना रहता था। उन्होंने कहा, "यह सबसे बढ़िया फैसला है कि गिरफ्तारी की शक्ति को हटाने की सिफारिश की गई। दूसरा अभियोजन की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ कर दी गई है। आज 1 करोड़ की कोई सीमा ही नहीं है। छोटा व्यापारी भी यह आंकड़ा पार कर जाता है। यह फैसला बहुत ही सराहनीय है।"
उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बयान से सहमति जताते हुए कहा कि पेनाल्टी 25 हजार से घटाकर 10 हजार करना, गिरफ्तारी का डर खत्म करना और अभियोजन की सीमा बढ़ाना, छोटे कारोबारियों के लिए इससे बड़ी राहत और कुछ नहीं हो सकती।
एक अन्य क्षेत्रीय परिषद सदस्य सीए नीतीश कुमार ने कहा कि ये सभी निर्णय बेहद यूजर-फ्रेंडली हैं। उन्होंने कहा, "पहले पंजीकरण में संशोधन या रद्दीकरण के लिए बहुत भागदौड़ करनी पड़ती थी, अब उसे स्वचालित कर दिया गया है। रिफंड प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाया गया है। जो प्रावधान कठोर लगते थे, अब उन्हें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की तरफ मोड़ा गया है।"
--आईएएनएस
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