ग्रेटर नोएडा में खुलेगा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का कैंपस, भारत-ऑस्ट्रेलिया शैक्षणिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम
ग्रेटर नोएडा, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा, शोध, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में जारी साझेदारी को अब नई गति मिलने जा रही है। ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने उत्तर प्रदेश में पहली बार अपना कैंपस स्थापित करने की औपचारिक घोषणा की है।
यह कैंपस ग्रेटर नोएडा में स्थापित किया जाएगा और इसका नाम ‘जलसेतु’ रखा गया है। कैंपस शुरू होने के बाद क्षेत्र के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा हासिल करने के लिए विदेश जाने की जरूरत काफी हद तक कम हो सकेगी।
सोमवार को दिल्ली स्थित नेशनल एग्रीकल्चर साइंस कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की मौजूदगी में ग्रेटर नोएडा कैंपस की औपचारिक घोषणा की।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव और प्रेरणा सिंह, न्यू साउथ वेल्स के कोषाध्यक्ष डेनियल मुकी तथा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं अध्यक्ष विशिष्ट प्रोफेसर जॉर्ज विलियम्स एओ शामिल रहे।
यूनिवर्सिटी का प्रस्तावित कैंपस ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय परिसर स्थित टावर-2 में स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से तीन फ्लोर लिए गए हैं। कैंपस को इसी वर्ष दिसंबर में शुरू करने की तैयारी है।
माना जा रहा है कि कैंपस के संचालन से ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्र के युवाओं को वैश्विक स्तर के पाठ्यक्रम, शोध और कौशल विकास के अवसर मिलेंगे। साथ ही उद्योगों की जरूरत के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने भारत में अपनी साझेदारी को और व्यापक बनाने की घोषणा की। विश्वविद्यालय की ओर से महिला सशक्तीकरण, बिजनेस, डेटा, इनोवेशन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए स्कॉलरशिप कार्यक्रम शुरू करने की भी घोषणा की गई। इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा और शोध के साथ-साथ रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराना है।
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति जॉर्ज विलियम्स एओ ने कहा कि भारत के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय ऐसे अवसर उपलब्ध कराना चाहता है, जिनके माध्यम से युवा भारत के सामाजिक और आर्थिक भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
वहीं, न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने कहा कि ग्रेटर नोएडा में स्थापित होने वाला कैंपस भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक सेतु का काम करेगा। इससे भारतीय विद्यार्थियों को वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी की विश्वस्तरीय शिक्षा अपने देश में ही हासिल करने का अवसर मिलेगा।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने भी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर कैंपस की स्थापना और संचालन में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है। विश्वविद्यालय और प्राधिकरण के बीच सहयोग से क्षेत्र में उच्च शिक्षा के साथ-साथ शोध एवं औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ग्रेटर नोएडा कैंपस को केवल शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित करने के बजाय ‘जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में स्थापित करने की भी घोषणा की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और देश के सामने मौजूद जल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए शोध संस्थानों, सरकार, उद्योग और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाना होगा।
केंद्र में भूजल की स्थिरता, नदियों के स्वास्थ्य, सतत सिंचाई और शहरी जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध किया जाएगा। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में नवाचार और व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर भी जोर रहेगा। इससे जल संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ी नीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय ने कैंपस शुरू करने के साथ ही सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा भी की है।
इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, सरकारी संस्थानों, बैंकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा।
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी में वर्तमान में करीब 50 हजार छात्र-छात्राएं नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विश्वविद्यालय को टाइम्स हायर एजुकेशन यूनिवर्सिटी इम्पैक्ट रैंकिंग में विश्व स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त होने का दावा किया गया है। ऐसे में ग्रेटर नोएडा में इसका कैंपस खुलना उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा में विदेशी विश्वविद्यालय के कैंपस की स्थापना से न केवल स्थानीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के विकल्प मिलेंगे, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शोध, तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और उद्योग आधारित शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
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