ग्रेटर नोएडा: 72 हजार वर्गमीटर जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े का मामला, पूर्व जीएम रवींद्र तोंगड़ समेत 11 नामजद
ग्रेटर नोएडा, 22 अगस्त (आईएएनएस)। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 72 हजार वर्गमीटर जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, जमीन हड़पने, करोड़ों रुपए की रकम में गड़बड़ी और धमकी देने के मामले में अदालत के आदेश पर थाना सेक्टर-20 में एफआईआर दर्ज की गई है।
मामले में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व महाप्रबंधक रवीन्द्र तोंगड़, उनकी पत्नी कुशल सिंह और सीआरसी ग्रुप से जुड़े तीन निदेशकों समेत 11 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि छह-सात अज्ञात लोगों का भी उल्लेख एफआईआर में किया गया है।
शिकायत गायत्री हॉस्पिटैलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि अवि सिंह की ओर से दी गई थी। शिकायत में करीब 34 हजार वर्गमीटर जमीन की कथित हेराफेरी, करीब पांच करोड़ रुपये की देनदारी और अन्य बकाया रकम के हिसाब-किताब में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है।
पूर्व जीएम रवीन्द्र तोंगड़ पर पद के कथित दुरुपयोग और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन से जुड़े लेनदेन में अनियमितता कराने का आरोप है। एफआईआर में उनकी पत्नी कुशल सिंह का नाम भी शामिल है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जमीन और कंपनी में हिस्सेदारी से जुड़े लेनदेन के दौरान मूल कंपनी के हितों की अनदेखी की गई।
शिकायत के मुताबिक, फरवरी 2011 में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने सेक्टर-1, ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित प्लॉट संख्या जीएच-11 की करीब 72 हजार वर्गमीटर जमीन गायत्री हॉस्पिटैलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड को लीज पर आवंटित की थी। आरोप है कि बाद में जमीन के अलग-अलग हिस्सों की सब-लीज के माध्यम से कथित तौर पर हेराफेरी शुरू हुई। वर्ष 2013 में करीब 20 हजार वर्गमीटर जमीन की सब-लीज इन्टाइसमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के नाम किए जाने का आरोप है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस कंपनी में पूर्व जीएम रवीन्द्र तोंगड़ के रिश्तेदारों को निदेशक बनाया गया और उनकी पत्नी कुशल सिंह को 73 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई। आरोप है कि पद के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए जमीन की सब-लीज अपने परिचितों से जुड़ी कंपनी के नाम कराई गई और इसके एवज में मूल संस्थान को निर्धारित भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद वर्ष 2014 में करीब 14 हजार वर्गमीटर जमीन की एक अन्य सब-लीज कोमली बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम किए जाने का आरोप लगाया गया।
शिकायत के मुताबिक, मूल रूप से 72 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट में फ्लैटों की बुकिंग शुरू होने के बाद परियोजना का क्षेत्रफल घटाकर करीब 36 हजार वर्गमीटर कर दिया गया। आरोप है कि पहले से बुक किए गए फ्लैटों को इसी कम क्षेत्रफल में समायोजित किया गया। शिकायत में वर्ष 2015-16 के दौरान हिस्सेदारी से जुड़े लेनदेन में करीब पांच करोड़ रुपये विभिन्न कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित किए जाने और रकम के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2018 में कथित फर्जी सब-लीज के जरिए जमीन पर सीआरसी ग्रुप के साथ संयुक्त उपक्रम के माध्यम से नई परियोजना विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। परियोजना के लिए बैंक ऋण लेने और अन्य कार्यों में कथित तौर पर फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। कंपनी के अभिलेखों और बैलेंस शीट में भी रकम से संबंधित कथित अनियमितताओं का आरोप है।
शिकायत में कहा गया है कि 31 मार्च 2025 को कंपनी मंत्रालय को भेजी गई बैलेंस शीट में बकाया रकम और हिसाब-किताब से जुड़ी गड़बड़ियां दर्ज की गईं। इसके अलावा दिसंबर 2025 में रकम और लेखा-जोखा को लेकर हुई बातचीत के दौरान शिकायतकर्ता को धमकी देने तथा उसका पीछा करने का आरोप भी लगाया गया है।
मामले में सीआरसी ग्रुप के निदेशक कुणाल भल्ला, सतीश गर्ग और हिमांशु गोयल समेत अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि, एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों की पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। न्यायालय के आदेश पर दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। मामले की विवेचना थाना सेक्टर-20 के उपनिरीक्षक जितेन्द्र सिंह को सौंपी गई है।
पुलिस अब जमीन के मूल आवंटन से लेकर सब-लीज, कंपनी में हिस्सेदारी, बैंक खातों में हुए लेनदेन, कंपनी के अभिलेख, बैलेंस शीट और कथित रूप से इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की जांच करेगी। गायत्री हॉस्पिटैलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि अवि सिंह का आरोप है कि विकास प्राधिकरण के पूर्व अधिकारी की कथित संलिप्तता और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर परियोजना को आगे बढ़ाया गया, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ।
उनका यह भी आरोप है कि प्राधिकरण से लेकर रेरा तक कथित रूप से गलत दस्तावेजों और विवादित भू-स्वामित्व के आधार पर नई परियोजना लाई गई, जिससे बैंक और घर खरीदार भी प्रभावित हुए। पुलिस की जांच में अब यह स्पष्ट किया जाएगा कि जमीन की सब-लीज और हिस्सेदारी में वास्तविक रूप से क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी, किन लोगों की भूमिका रही और कथित तौर पर रकम व दस्तावेजों में किस स्तर पर अनियमितता हुई।
--आईएएनएस
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