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ग्रामीण भारत को विकसित करने में एआई का महत्वपूर्ण योगदान

पटना, 24 फरवरी (आईएएनएस)। ग्रामीण भारत में विकास और शासन को मजबूत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की एआई फॉर ऑल रणनीति और हाल के दिशा-निर्देशों के तहत एआई को समावेशी विकास का प्रमुख साधन बनाया जा रहा है, खासकर गांवों और दूरदराज के इलाकों में। नीति आयोग द्वारा जून 2018 में जारी राष्ट्रीय रणनीति ने एआई को परिवर्तनकारी उपकरण के रूप में पहचाना था।
 
ग्रामीण भारत को विकसित करने में एआई का महत्वपूर्ण योगदान

पटना, 24 फरवरी (आईएएनएस)। ग्रामीण भारत में विकास और शासन को मजबूत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की एआई फॉर ऑल रणनीति और हाल के दिशा-निर्देशों के तहत एआई को समावेशी विकास का प्रमुख साधन बनाया जा रहा है, खासकर गांवों और दूरदराज के इलाकों में। नीति आयोग द्वारा जून 2018 में जारी राष्ट्रीय रणनीति ने एआई को परिवर्तनकारी उपकरण के रूप में पहचाना था।

अब बिहार भी इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और अन्य परियोजनाएं शामिल हैं। ये कदम कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और शासन जैसे क्षेत्रों में एआई के जरिए दूर-दराज की आबादी तक सेवाएं पहुंचाने पर केंद्रित हैं।

ग्रामीण ई-गवर्नेंस में एआई के व्यावहारिक उपयोग बढ़ रहे हैं। सरकार कई नए प्लेटफॉर्म और मिशन चला रही है, जो पारदर्शिता, रोजगार, कृषि, शिक्षा और भाषाई समावेशन को मजबूत कर रहे हैं। पंचायती राज मंत्रालय ने अगस्त 2025 में 'सभासार' नामक एआई टूल लॉन्च किया। यह ग्राम सभा और पंचायत बैठकों के ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग से स्वचालित रूप से संरचित मिनट्स तैयार करता है। भाषिनी प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ने से यह 14 भारतीय भाषाओं में काम करता है। इससे दस्तावेजीकरण आसान, सटीक और बहुभाषी हो गया है। मैन्युअल काम कम होने से अधिकारी पंचायतों के 9 सतत विकास लक्ष्यों पर ज्यादा ध्यान दे पा रहे हैं। दिसंबर 2025 तक 92 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों ने इस टूल का उपयोग किया।

ई-ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म पंचायतों के बजट, लेखांकन, निगरानी और भुगतान को डिजिटल रूप से जोड़ता है। 2025-26 में यह 2 लाख 50 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है। इसी तरह ग्राम मानचित्र जीआईएस आधारित टूल से गांव की संपत्तियों का मानचित्रण, परियोजना निगरानी और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में स्थानिक डेटा का उपयोग संभव हो रहा है। इससे साक्ष्य आधारित योजना बनाना और आपदा प्रबंधन मजबूत हुआ है।

एआई कोष एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है, जो सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों से डेटासेट और तैयार एआई मॉडल उपलब्ध कराता है। फरवरी 2026 तक इसमें 20 उद्योगों से जुड़े 7,500 से अधिक डेटासेट और 273 मॉडल हैं। ग्रामीण ई-गवर्नेंस और लोक प्रशासन के लिए समाधान विकसित करने में यह उपयोगी साबित हो रहा है। प्लेटफॉर्म पर 69 लाख से अधिक विजिट और 5 हजार मॉडल डाउनलोड हो चुके हैं।

भूप्रहरी एआई और जीआईएस तकनीक से मनरेगा के तहत बनी संपत्तियों की रीयल-टाइम निगरानी करता है। इसे विकसित भारत गारंटी के तहत सभी संपत्तियों की ट्रैकिंग के लिए विस्तारित किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।

कृषि में एआई का प्रभाव देखने लायक है। कृषि मंत्रालय ने किसानों के लिए कई टूल लॉन्च किए हैं। किसान ई-मित्र एक वर्चुअल असिस्टेंट है, जो सरकारी योजनाओं और आय सहायता की जानकारी देता है। राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली और फसल स्वास्थ्य मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म उपग्रह चित्र, मौसम और मिट्टी के डेटा से रीयल-टाइम सलाह देते हैं। इससे कीटों का जल्दी पता लगता है, सिंचाई और बुवाई का सही समय तय होता है तथा फसल उत्पादन बढ़ता है।

शिक्षा और कौशल विकास में भी एआई सक्रिय है। एनसीईआरटी के दीक्षा प्लेटफॉर्म में एआई से वीडियो सर्च और रीड-अलाउड टूल हैं, जो दिव्यांग छात्रों के लिए बहुत सहायक हैं। यूथ फॉर प्रोग्रेस और विकास को एआई (युवा) कार्यक्रम कक्षा 8 से 12 के छात्रों को एआई और डिजिटल कौशल सिखाता है, ताकि वे भविष्य के लिए तैयार हों। भाषाई समावेशन में भाषिनी की भूमिका बड़ी है। यह 36 से अधिक भारतीय भाषाओं में अनुवाद, स्पीच-टू-टेक्स्ट और वॉयस इंटरफेस प्रदान करता है। 23 से ज्यादा सरकारी सेवाओं से जुड़ा यह प्लेटफॉर्म ग्रामीण इलाकों में कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए डिजिटल सेवाएं आसान बना रहा है। अक्टूबर 2025 तक 350 से अधिक एआई मॉडल और 10 लाख डाउनलोड हो चुके हैं।

जून 2025 में लॉन्च हुआ भारतजेन एआई भारत का पहला सरकारी बहुभाषी, मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल है। यह 22 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट, स्पीच और इमेज संभालता है। आदि वाणी जनजातीय भाषाओं के लिए एआई टूल है, जो अगस्त 2025 में लॉन्च हुआ। पंचायती राज मंत्रालय ने 'पंचम' चैटबॉट लॉन्च किया, जो पंचायत प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करता है। एआई के सकारात्मक उपयोग से ग्रामीण युवाओं को ट्रेनिंग देकर स्थानीय रोजगार से जोड़ा जा रहा है, पलायन रुकेगा और दूरदराज के गांवों में डॉक्टरों की कमी भी पूरी हो सकेगी। एआई ग्रामीण भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

--आईएएनएस

एमएस/