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उर्वरकों के दुरुपयोग से निपटने के लिए भारत सरकार के अलग-अलग विभाग मिलकर काम करेंगे: जेपी नड्डा

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को कहा कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग और खेती के इतर उनके दुरुपयोग की समस्याओं से निपटने के लिए भारत सरकार के अलग-अलग विभाग मिलकर काम करेंगे।
 
उर्वरकों के दुरुपयोग से निपटने के लिए भारत सरकार के अलग-अलग विभाग मिलकर काम करेंगे: जेपी नड्डा

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को कहा कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग और खेती के इतर उनके दुरुपयोग की समस्याओं से निपटने के लिए भारत सरकार के अलग-अलग विभाग मिलकर काम करेंगे।

केंद्रीय मंत्री नड्डा ने यह बयान भारत सरकार के उर्वरक विभाग की ओर से राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित चिंतन शिविर में चर्चा के दौरान जिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को हमेशा ही केंद्र में रखा है, इसीलिए हमारी नीतियों और फैसलों से किसानों का जीवन आसान बनना ही हमारी प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि तमाम विकट परिस्थितियों के बाद भी उर्वरक विभाग ने किसानों की उर्वरक जरूरतों को पूरा करने का कार्य समय पर किया है। उर्वरक विभाग के उठाए गए किसान हितैषी कदमों का ही परिणाम है कि हमने आयात के साथ-साथ उत्पादन में भी इस वर्ष रिकॉर्ड बनाया है।

उन्होंने कहा कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग और खेती के इतर उनके दुरुपयोग की समस्याओं से निपटने के लिए भारत सरकार के अलग-अलग विभाग मिलकर काम करेंगे।

शिविर में केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि भारत दुनिया के लिए खाद्य भंडार का केंद्र बने। आगे उन्होंने कहा कि इस चिंतन से सरकार को कुछ ऐसे विचार मिलेंगे जो भारत को 2047 तक विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत आने वाले उर्वरक विभाग ने बयान में कहा कि राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, नई दिल्ली में आयोजित एक दिवसीय चिंतन शिविर के दौरान 15 अलग-अलग समूहों ने आपस में विचार विमर्श कर भारत सरकार को कुछ कारगर सुझाव दिए हैं।

केंद्रीय उर्वरक और रसायन मंत्री, राज्य मंत्री और सचिव उर्वरक ने सभी समूहों के साथ अलग-अलग बैठकर चर्चा की और उनके सुझावों को सुना। इन समूहों ने नए दौर में उर्वरक, उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता, किसानों से संवाद, उर्वरक इकोसिस्टम को डिजिटल तरीकों से बेहतर बनाने, पोषण आधारित सब्सिडी सहित 15 विषयों पर विमर्श किया।

--आईएएनएस

एबीएस/