गोवा पुलिस ने लॉन्च किया 1930 के लिए एआई-आधारित वॉयस असिस्टेंट, 12 भाषाओं में दर्ज होगी साइबर शिकायत
पणजी, 7 सितंबर (आईएएनएस)। गोवा पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में एक और बड़ी तकनीकी छलांग लगाई है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार पणजी के श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में आयोजित 'प्रेसिडेंट्स कलर परेड' के दौरान 1930 साइबरक्राइम हेल्पलाइन के लिए एआई-आधारित वॉयस असिस्टेंट को लॉन्च किया।
यह गोवा पुलिस की टेक्नोलॉजी-आधारित, सक्रिय और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में केंद्रीय गृह मंत्री ने ही गोवा में क्लाउड टेलीफोनी-आधारित 1930 साइबर हेल्पलाइन लॉन्च की थी।
पुलिस के मुताबिक, इस पहल ने अपनी शुरुआत के बाद से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में गोवा की प्रतिक्रिया क्षमता को काफी मजबूत किया है और यह सुनिश्चित किया है कि हेल्पलाइन पर आने वाली साइबर धोखाधड़ी की कोई भी कॉल बिना जवाब के न रहे।
इस टेक्नोलॉजी-आधारित पहल का असर राज्य में साइबर धोखाधड़ी के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। प्रतिक्रिया तेज होने के कारण जनवरी से अगस्त 2026 की अवधि में साइबर धोखाधड़ी में गंवाई गई रकम में 30 प्रतिशत की भारी कमी आई है। यह समय पर रिपोर्टिंग, त्वरित कार्रवाई और समन्वित प्रतिक्रिया की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
इस इकोसिस्टम को और आगे बढ़ाते हुए गोवा पुलिस की एआई-एमएल लैब ने 1930 हेल्पलाइन के लिए यह नया एआई वॉयस असिस्टेंट विकसित किया है। यह सिस्टम शिकायतकर्ताओं से सीधे बातचीत करने में सक्षम होगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, कोंकणी, ओडिया, गुजराती समेत 12 भाषाओं में संवाद कर सकता है।
यह वॉयस असिस्टेंट घटना का आवश्यक विवरण इकट्ठा करेगा और शिकायत दर्ज करेगा, जिससे रिपोर्टिंग प्रक्रिया तेज, अधिक सुलभ और नागरिक-अनुकूल बन जाएगी। गोवा जैसे पर्यटक राज्य में जहां देश-विदेश से लोग आते हैं, वहां भाषा की बाधा एक बड़ी समस्या थी। इस अनूठी पहल का उद्देश्य उसी बाधा को दूर करना, प्रतिक्रिया समय को कम करना और साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों का आसानी से पंजीकरण सुनिश्चित करना है, खासकर तब जब कॉल की संख्या बहुत अधिक हो।
गोवा पुलिस का कहना है कि यह कदम साइबर पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।
--आईएएनएस
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