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गहलोत का केंद्र सरकार पर हमला, बोले-पचपदरा रिफाइनरी में देरी से विकास और रोजगार प्रभावित

जयपुर, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट को लेकर वर्तमान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस परियोजना को संभालने के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें लगातार देरी की गई है, जिससे इसकी लागत कई गुना बढ़ गई है।
 
गहलोत का केंद्र सरकार पर हमला, बोले-पचपदरा रिफाइनरी में देरी से विकास और रोजगार प्रभावित

जयपुर, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट को लेकर वर्तमान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस परियोजना को संभालने के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें लगातार देरी की गई है, जिससे इसकी लागत कई गुना बढ़ गई है।

गहलोत ने कहा कि इस परियोजना की शुरुआती लागत लगभग 37,229 करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर करीब 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी खराब योजना और राजनीतिक कारणों से हुई देरी का नतीजा है। उन्होंने इसे विकास कार्यों में देरी का एक उदाहरण बताते हुए “इंतजार शास्त्र” का मेगा चैप्टर कहा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इस परियोजना में जानबूझकर देरी की है, जिससे राज्य की जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय इस परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया था, लेकिन बाद में इसमें रुकावटें आईं।

गहलोत ने यह भी कहा कि इस देरी के कारण राजस्थान की अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार के अवसरों पर नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा राजस्थान के विकास को लेकर इतनी उदासीन क्यों है?

उन्होंने परियोजना की शुरुआत का जिक्र करते हुए बताया कि इसकी परिकल्पना 2008 में कांग्रेस सरकार के दौरान की गई थी। उस समय हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ बातचीत शुरू हुई थी, हालांकि शुरुआत में कंपनी इस परियोजना को लेकर हिचकिचा रही थी। बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद इस परियोजना को मंजूरी मिली थी। उन्होंने यह भी बताया कि सोनिया गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी, जिसका उद्देश्य राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत बनाना था।

गहलोत का कहना है कि सरकार बदलने के बाद इस परियोजना में राजनीतिक कारणों से बाधाएं आईं और काम की गति धीमी पड़ गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वजह से यह महत्वपूर्ण परियोजना प्रभावित हुई है और राज्य के विकास पर इसका असर पड़ा है।

अशोक गहलोत ने कहा कि यह प्रोजेक्ट कई साल तक अटका रहा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को इसके लिए कई बार विरोध प्रदर्शन करने पड़े और दबाव बनने के बाद ही भाजपा ने 2018 में इस पर दोबारा काम शुरू किया।

गहलोत ने अपनी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब कांग्रेस फिर से सत्ता में आई, तो इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी गई। उनके अनुसार, कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद काम लगातार आगे बढ़ता रहा और उनकी सरकार के दौरान लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट में हुई देरी का सीधा असर रोजगार और आर्थिक विकास पर पड़ा है। गहलोत के मुताबिक इस देरी की वजह से राजस्थान के युवाओं को कई महत्वपूर्ण अवसरों से वंचित होना पड़ा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने पचपदरा रिफाइनरी को कांग्रेस सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि जब यह परियोजना लगभग पूरी होने की स्थिति में है तो इसका आकार और प्रगति जनहित के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, यह एक ऐसा विकास मॉडल है जिसमें राजनीतिक हितों से ऊपर जनता के हित को प्राथमिकता दी गई।

पचपदरा रिफाइनरी से इस क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, हालांकि इस परियोजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और बहस अब भी जारी है।

--आईएएनएस

वीसी