गढ़वाल हिमालय में स्थित सिद्ध पीठ मां सुरकंडा देवी धाम, हर साल मनता है गंगा दशहरा उत्सव
उत्तराखंड, 24 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय की शांत और विशाल पर्वत शृंखलाओं के बीच स्थित सिद्ध पीठ मां सुरकंडा देवी मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि भारत के प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र स्थल भी है।
मान्यता है कि यहां माता सती का सिर (मस्तक) गिरा था, जिस वजह से इसका नाम 'सिरकंडा' और बाद में 'सुरकंडा' पड़ा। गुरुवार को उत्तराखंड के मुख्यमत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर के लिए खास अपने मन के भाव शब्दों के जरिए बयां किए। उन्होंने वीडियो पोस्ट कर लिखा, "टिहरी जिले में सिद्ध पीठ मां सुरकंडा देवी मंदिर ने भक्तों की सुविधा के लिए 5 करोड़ रुपए की लागत से रोपवे सर्विस शुरू की है। इससे बुज़ुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए माँ के दर्शन करना और भी आसान हो गया है। रोपवे सर्विस शुरू होने से मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।"
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव सती के पार्थिव शरीर को लेकर वैरागी होकर आकाश मार्ग से भ्रमण कर रहे थे, तब इसी स्थान पर माता सती का सिर (सिर/मस्तक) गिरा था। समुद्र तल से लगभग 2,757 मीटर (9,000 फीट) की ऊँचाई पर स्थित यह धाम वर्ष भर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति, शक्ति और देवी मां के दिव्य आशीर्वाद का अहसास कराता है।
यहां विभिन्न प्रकार एवं रंगों के फूल एवं जड़ी बूटियां बहुतायत में पायी जाती है एवं पश्चिमी हिमालय के कुछ खूबसूरत पक्षी भी पाए जाते हैं | प्रत्येक वर्ष मई और जून के बीच अधिसंख्य तीर्थ यात्रियों के बीच यहां गंगा दशहरा का उत्सव हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है | दरअसल, मंदिर के पास नीचे एक विशेष जलधारा है, जिसे गंगा के समान पवित्र माना जाता है। इसी जल से माता का अभिषेक किया जाता है और यहां गंगा दशहरा का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।
नव निर्मित सुरकंडा माता का मंदिर रोंसली के वृक्षों के बीच स्थित है जो कोहेरे के बीच अत्यंत सुंदर दिखाई देता है एवं वर्ष भर पर्यटकों एवं भक्तों से घिरा रहता है| श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए कद्दूखाल से मंदिर तक सुरकंडा देवी रोपवे सेवा शुरू की गई है, जिससे यात्रा अब बेहद आसान हो गई है।
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