गरबा हिंदू धर्म का आयोजन, आपत्ति है तो मुस्लिम न जाएं, सम्मान करना चाहिए: मौलाना नदीम सिद्दीकी
मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की ओर से गरबा आयोजनों को लेकर जारी दिशा-निर्देशों पर मौलाना हाफिज नदीम सिद्दीकी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गरबा और डांडिया हिंदू समुदाय के धार्मिक आयोजन हैं और यदि आयोजक चाहते हैं कि दूसरे धर्म के लोग इसमें शामिल न हों तो मुस्लिम युवाओं को इसका सम्मान करना चाहिए। साथ ही, उन्होंने धार्मिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने की अपील की।
मौलाना सिद्दीकी ने मुस्लिम युवाओं से अपील की कि यदि किसी आयोजन को लेकर आयोजकों को आपत्ति है तो वे उसमें शामिल होने से परहेज करें। किसी भी समुदाय के धार्मिक आयोजन का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं, डीजे और लाउडस्पीकर को लेकर उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले से कानून और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन मौजूद है। रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पाबंदी है और आयोजकों को निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह नियम किसी एक धर्म के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए समान होना चाहिए। यदि कोई इसका उल्लंघन करता है तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। किसी विशेष समुदाय के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के बजाय कानून को सभी पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों पर सिद्दीकी ने कहा कि वह कई बार इस तरह की बातें करते रहे हैं, लेकिन उनकी कथनी और करनी में अंतर दिखाई देता है। यदि भागवत अपने बयानों पर वास्तव में अमल करते हैं और देश में सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिए कदम उठाते हैं तो वे उनका समर्थन करेंगे।
सिद्दीकी ने कहा कि केवल बयान देने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आरएसएस और सरकार के सामने भी उसी सोच को रखा जाए और जमीन पर उसका पालन हो। उन्होंने दावा किया कि देश में अल्पसंख्यकों को लेकर उठ रहे सवालों का असर भारत की छवि पर भी पड़ रहा है।
सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों के जरिए हिंदू-मुस्लिम तनाव पैदा करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने पूजा स्थलों से संबंधित 1991 के कानून का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों की स्थिति को लेकर कानूनी व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए। देश संविधान के मुताबिक चलता है और सभी पक्षों को संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। सिद्दीकी ने दावा किया कि कुछ मामलों में कार्रवाई केवल एक समुदाय के धार्मिक स्थलों पर केंद्रित दिखाई देती है।
सहारनपुर की घटना पर सिद्दीकी ने मस्जिद कमेटी के दावे का हवाला देते हुए कहा कि मस्जिद 100 साल से ज्यादा पुरानी बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई जल्दबाजी में की गई और यदि प्रशासनिक आदेश को चुनौती देनी थी तो संबंधित पक्षों के पास उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता था। यूपी चुनाव के मद्देनजर हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को हवा देने की कोशिश की जा रही है।
जमीयत के आगे के रुख पर सिद्दीकी ने कहा कि मामले को अदालत में ले जाया जाएगा और सहारनपुर मस्जिद प्रकरण में हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की किसी भी कोशिश को लेकर सभी नागरिकों को चिंतित होना चाहिए। देश की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ और आपसी भाईचारे की परंपरा कायम रहनी चाहिए। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन संविधान और देश की एकता स्थायी महत्व रखते हैं।
मौलाना सिद्दीकी ने कहा कि सरकार की नीतियों से असहमत लोगों के खिलाफ कार्रवाई के आरोपों को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। मुसलमानों के साथ-साथ दलितों और अन्य समुदायों से जुड़े लोगों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक आयोजनों, मस्जिदों और अन्य पूजा स्थलों से जुड़े मामलों में कानून का पालन निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। नए कानून बनाने से अधिक जरूरी मौजूदा कानूनों का समान और प्रभावी क्रियान्वयन है।
--आईएएनएस
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