5 साल तक बकाया रखने वाले दौर से बाहर निकला शुगर सेक्टर: प्रह्लाद जोशी
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुगर सेक्टर में मोदी सरकार के रिफॉर्म्स का ब्योरा दिया। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश थी कि किसान आंदोलन न करें और सीधे आकर बात करें, लेकिन प्रशासन ने बताया कि किसान पहले आंदोलन करना चाहते हैं।
मंत्री ने दावा किया कि पीएम मोदी के आने के बाद एफआरपी में लगातार बढ़ोतरी, 14 दिन में भुगतान की अनिवार्यता और इथेनॉल क्रांति से सेक्टर की तस्वीर बदल गई है। मौजूदा शुगर ईयर में 98 फीसदी और पिछले साल 99 फीसदी गन्ना भुगतान हो चुका है, जबकि पहले किसानों को 5 साल तक भी भुगतान नहीं मिलता था।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, "किसान मेरे घर पर आए थे। मैं इधर था, जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि मेरी जिम्मेदारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से, अभी बहुत ज्यादा है। पांच विभाग हैं, तीन मंत्रालय हैं, इसलिए मैं कम से कम चार-पांच दिन तो सामान्यतः दिल्ली में ही रहता हूं। पहले से ही ऐसा है और अभी तो और भी ज्यादा प्रेशर है, इसी कारण मैं इधर था। आने से पहले भी मैंने बताया था कि आपको इस धूप में आंदोलन करने की जरूरत नहीं है। आप आ जाइए, हम बात करेंगे। ऐसा मैंने कहा था, क्योंकि मुझे मिलने के लिए कोई आवेदन नहीं मिला था।"
उन्होंने आगे कहा, "हमने उनसे कहा था कि उन्हें इधर भेजिए, हम मिलेंगे, प्यार से बातचीत करेंगे। ऐसा उन्हें कहा था, लेकिन अंततः पहले वे आंदोलन करेंगे, बाद में आएंगे, ऐसी रिपोर्ट मुझे डीसी ने दी थी। एमएलए ने बताया कि आंदोलन चल रहा है, तो मैंने कहा कि उधर मैंने उनसे अपील की, उन्हें आश्वासन दिया है।"
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "पीएम मोदी के आने के बाद इथेनॉल, जो पहले 38 करोड़ लीटर खरीदा जाता था, वह अब 1200 करोड़ लीटर हो गया है और उसमें जो भी गन्ना मिल में, शुगर मिल में इथेनॉल का उत्पादन होता है, लगभग हम सब खरीदते हैं। फैक्ट्री वालों ने अलग-अलग स्रोतों से भी इथेनॉल बनाना शुरू कर दिया है।"
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, "हम यह भी देख रहे हैं कि इसका औद्योगिक उपयोग कैसे हो सकता है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने व्यवस्था की है कि मिलों द्वारा किसानों के गन्ने का भुगतान 14 दिनों के भीतर किया जाए। इससे पहले भी हमने मिल मालिकों को 16,500 करोड़ रुपए की सहायता बेहद कम ब्याज वाले सॉफ्ट लोन के रूप में दी थी, जिससे दो-तीन साल से लंबित गन्ना किसानों का बकाया भुगतान पूरा किया गया।"
उन्होंने आगे कहा, "अब इथेनॉल की खरीद पर भी हमने एडवाइजरी जारी की है कि इथेनॉल की खरीद के एवज में दिया जाने वाला भुगतान मिलों को मिलने के 15-20 दिनों के भीतर पहली प्राथमिकता के आधार पर किसानों को किया जाए। इसी का परिणाम है कि मौजूदा शुगर सीजन में अब तक आपूर्ति किए गए गन्ने का 98 प्रतिशत भुगतान किसानों को हो चुका है।"
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "पिछले सीजन में 99 प्रतिशत भुगतान हुआ है। कुल मिलाकर इस सेक्टर में हमने बहुत सुधार किए हैं। इथेनॉल की वजह से शुगर मिलों की जो पहले स्थिति थी, वह भी अपेक्षाकृत सुधरी है और किसानों को भुगतान समय पर मिल रहा है। पहले पांच साल तक भी भुगतान नहीं मिलता था।"
--आईएएनएस
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