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गाय को 'राष्ट्र माता' या 'राष्ट्रीय धरोहर' का दर्जा दिया जाना चाहिए: आलोक कुमार

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने गोरक्षा और गायों के संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार से व्यापक केंद्रीय कानून बनाने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि यह मांग नई नहीं है, बल्कि वीएचपी लंबे समय से गायों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय स्तर पर कानून बनाने की मांग करती रही है। उन्होंने गोरक्षा के लिए काम करने वाले कामधेनु आयोग को और अधिक शक्तिशाली व सक्षम बनाने के साथ-साथ गाय को राष्ट्र माता या राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिए जाने की भी मांग की।
 

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने गोरक्षा और गायों के संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार से व्यापक केंद्रीय कानून बनाने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि यह मांग नई नहीं है, बल्कि वीएचपी लंबे समय से गायों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय स्तर पर कानून बनाने की मांग करती रही है। उन्होंने गोरक्षा के लिए काम करने वाले कामधेनु आयोग को और अधिक शक्तिशाली व सक्षम बनाने के साथ-साथ गाय को राष्ट्र माता या राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिए जाने की भी मांग की।

गोरक्षा के लिए अपनी जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि गायों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रभावी एवं व्यापक व्यवस्था की आवश्यकता है। वीएचपी 1948 से ही इस विषय पर केंद्रीय कानून की मांग करती आ रही है और आगे भी इसके लिए दबाव बनाए रखेगी। गायों के संरक्षण के लिए गठित कामधेनु आयोग की शक्तियों और कार्यक्षमता को बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वह प्रभावी तरीके से काम कर सके। गाय को राष्ट्र माता या राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिए जाने की मांग भी वीएचपी की पुरानी मांगों में शामिल है।

राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर भी आलोक कुमार ने तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें 1990 की घटनाएं याद हैं। जनता भी उन घटनाओं को भूली नहीं है। 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि कीर्तन कर रहे 16 कारसेवक पुलिस की गोलीबारी में मारे गए थे। बाद में संसद में एक बहस के दौरान राम गोपाल यादव ने कहा था कि हमने मस्जिद को बचाने का वादा किया था। भले ही 16 या 30 लोग मारे जाते, फिर भी हम मस्जिद को बचाते। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने भी 2006 में एक हलफनामा दिया था, जिसमें कहा गया था कि भगवान राम के अस्तित्व को साबित करने के लिए कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं है।

शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले को लेकर भी आलोक कुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हिंसा की हर घटना निंदनीय है। यदि किसी नेता पर हमला होता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। किसी भी व्यक्ति पर हमला भारत के लोकतंत्र का अपमान है और ऐसी घटना की पूरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित घटना की भी जांच की जाएगी और इसके पीछे की वास्तविक परिस्थितियां सामने आएंगी।

विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े प्रस्तावित बिल को आलोक कुमार ने देश के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि इस बिल को लेकर कुछ लोगों के मन में सवाल हो सकते हैं, लेकिन इन्हीं सवालों पर संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में विस्तार से चर्चा की जा सकती है। जेपीसी में शामिल सांसद बैठकर विधेयक के प्रावधानों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं और जरूरत के मुताबिक इसमें सुधार कर इसे और मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संसदीय प्रक्रिया के बाद देश के हित में एक बेहतर और प्रभावी कानून सामने आएगा।

उन्होंने आगे कहा कि एफसीआरए से जुड़े प्रावधानों पर व्यापक चर्चा और समीक्षा की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। यदि किसी प्रावधान में सुधार की आवश्यकता है तो जेपीसी के स्तर पर उस पर विचार किया जा सकता है।

--आईएएनएस

पीएसके