Aapka Rajasthan

फ्रांस हिंसा पर ईरान ने ली चुटकी, सख्‍त कार्रवाई वाले बयान पर मैक्रों को याद द‍िलाया 'प्रदर्शन का अधिकार'

तेहरान, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। फ्रांस के कई शहरों में प्रदर्शन, हिंसा और झड़पों को लेकर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपनी ही बातों से सबक लेने की सलाह दी। बाघेई ने मैक्रों को 'प्रदर्शन के अधिकार' की बात दिलाई जो उन्होंने जनवरी में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कही थी।
 

तेहरान, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। फ्रांस के कई शहरों में प्रदर्शन, हिंसा और झड़पों को लेकर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपनी ही बातों से सबक लेने की सलाह दी। बाघेई ने मैक्रों को 'प्रदर्शन के अधिकार' की बात द‍िलाई जो उन्‍होंने जनवरी में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कही थी।

बाघेई ने पूछा कि ईरान और फ्रांस में होने वाले प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग रवैया क्‍यों? उन्‍होंने कहा क‍ि अब जब संकट की स्थिति फ्रांस के अपने दरवाजे तक पहुंच गई है और अमेरिका में भी 'नो किंग्स' जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं, तो मैक्रों को इतिहास से सबक लेना चाहिए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर मैक्रों को संबोधित करते हुए बाघेई ने कहा कि इस साल जनवरी में फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 'बिना किसी डर और सजा के शांतिपूर्ण प्रदर्शन' का समर्थन किया था।

बाघेई का दावा है कि उस समय प्रदर्शनकारी विदेशी ताकतों के उकसावे पर ईरानी पुलिस केंद्रों और सरकारी संस्थानों पर हमले कर रहे थे, लेकिन तब मैक्रों ने उनके प्रदर्शन के अधिकार की बात की थी।

उन्होंने कहा कि अब जब फ्रांस में अशांति और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है, तो मैक्रों यह कह रहे हैं कि सरकारी संस्थानों पर हमले और तोड़फोड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को जल्द सजा दी जाएगी।

बाघेई ने कहा कि ईरान यह नहीं भूला है कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ कार्रवाई से पहले मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को संदेश भेजकर कहा था कि 'हम ईरान के मामले में बड़े काम कर सकते हैं।'

ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, बाद में इसका मतलब यह निकला कि फ्रांस उन कदमों के साथ खड़ा था जिन्हें वह ईरान के खिलाफ आक्रामक अभियान मानता है। बाघेई ने आरोप लगाया कि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया।

उन्होंने आगे कहा कि अब जब संकट की स्थिति फ्रांस के अपने दरवाजे तक पहुंच गई है और अमेरिका में भी 'नो किंग्स' जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं, तो मैक्रों को इतिहास से सबक लेना चाहिए।

बाघेई ने लिखा, "इतिहास सिर्फ खिड़की से खड़े होकर दुनिया को जलते हुए नहीं देखता। कभी-कभी वही आग उन लोगों के घर तक भी पहुंच जाती है जिन्होंने उसे भड़काने में भूमिका निभाई होती है।"

अपने संदेश के अंत में उन्होंने प्रसिद्ध फ्रांसीसी लेखक जीन डी ला फॉन्टेन का एक कथन भी पोस्‍ट किया।

उन्होंने लिखा, "बहुत चालाकी से बनाई गई कोई तरकीब कभी-कभी उसी व्यक्ति के खिलाफ चली जाती है जिसने उसे बनाया हो, और विश्वासघात अक्सर अपने मालिक के पास लौटकर आता है।"

--आईएएनएस

एवाई/एएस