'फ्लॉप शो' में दर्शकों को हंसाने वाले जसपाल भट्टी गंभीर मसलों को मजाकिया अंदाज में करते थे पेश
मुंबई, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। 80 और 90 के दशक के टीवी दर्शकों के लिए जसपाल भट्टी का नाम कभी नहीं भुलाया जा सकता है। इस हास्य कलाकार ने टीवी पर अपने अनोखे शो के जरिए दर्शकों को खूब गुदगुदाया। उनकी खासियत थी कि वह दर्शकों के सामने गंभीर मसलों को मजाकिया अंदाज में पेश किया करते थे। वर्ष 2012 में 25 अक्टूबर को सड़क हादसे में उनका निधन हो गया था।
3 मार्च 1955 को अमृतसर में जन्मे जसपाल भट्टी ने गंभीर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को इतने हल्के-फुल्के और मजेदार अंदाज में पेश किया कि लोग हंसते-हंसते सोचने पर मजबूर हो जाते थे। उन्हें दूरदर्शन के 'फ्लॉप शो' और 'उल्टा पुल्टा' जैसे शो के लिए याद किया जाता है, जो आज भी लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला देते हैं।
जसपाल भट्टी ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी लेकिन उनका असली जुनून लोगों को हंसाना था। उन्होंने नुक्कड़ नाटकों से शुरुआत की थी। फिर देखते ही देखते वह दूरदर्शन तक पहुंच गए। जसपाल ने चंडीगढ़ के एक अखबार में कार्टूनिस्ट के तौर पर भी काम किया। कार्टून बनाने का अनुभव उन्हें आम आदमी की समस्याओं और सिस्टम की खामियों को गहराई से समझने में मददगार साबित हुआ। इसी हुनर ने उन्हें टीवी पर कॉमेडी का बादशाह बना दिया।
जसपाल ने पत्नी सविता भट्टी के साथ मिलकर शो बनाए, जिसमें कोई भारी-भरकम सेट नहीं होते थे, न ही डबल मीनिंग या अश्लीलता भरी बातें। सब कुछ साफ-सुथरा, सीधा और बेहद प्रभावी होता था। 'फ्लॉप शो' 90 के दशक में जबरदस्त हिट रहा। इस शो में सरकारी दफ्तरों, नौकरशाही, भ्रष्टाचार और आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों को इतने मजेदार तरीके से दिखाया जाता था कि दर्शक हंसते-हंसते अपनी ही जिंदगी की सच्चाई देख लेते थे।
'उल्टा पुल्टा' में भी यही अंदाज था। जसपाल भट्टी ने कई अन्य शो भी बनाए और पेश किए, जैसे 'फुल टेंशन,' 'हाय जिंदगी बाय जिंदगी,' और 'थैंक यू जीजा जी।' वे टीवी शो तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने पंजाबी और हिंदी फिल्मों में भी काम किया। वर्ष 1999 में आई पंजाबी फिल्म 'माहौल ठीक है' में उन्होंने पुलिस और कानून व्यवस्था पर करारा व्यंग्य किया। उन्होंने 'कुछ मीठा हो जाए,' 'आ अब लौट चलें,' और 'इकबाल' जैसी फिल्मों में भी अभिनय किया।
जसपाल भट्टी की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह आम जनता की भाषा में बोलते थे, उनकी समस्याओं को समझते थे, और बिना किसी कटुता के सिस्टम पर तंज कसते थे। यही वजह थी कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सब उन्हें पसंद करते थे। 25 अक्टूबर 2012 को एक सड़क हादसे में जसपाल भट्टी का निधन हो गया था। उनके निधन ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। आज भी जब 'फ्लॉप शो' के कोई भी पुराने एपिसोड दिखते हैं, तो दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
--आईएएनएस
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