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तमिलनाडु में विजय ने हासिल किया विश्वास मत, 144 विधायकों का मिला साथ

चेन्नई, 13 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार पास हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया। सीएम को 144 विधायकों का साथ मिला है जबकि विरोध में सिर्फ 22 वोट पड़े।
 
तमिलनाडु में विजय ने हासिल किया विश्वास मत, 144 विधायकों का मिला साथ

चेन्नई, 13 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार पास हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया। सीएम को 144 विधायकों का साथ मिला है जबकि विरोध में सिर्फ 22 वोट पड़े।

दूसरी ओर, तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को विश्वास मत की कार्यवाही के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने सदन से वॉकआउट कर दिया। उदयनिधि ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर तीखा हमला बोला और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के बहुमत की वैधता पर सवाल उठाए।

विश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान बोलते हुए, उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी गठबंधन के पास 234 सदस्यों वाली विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए जरूरी 118 सदस्यों की संख्या नहीं है।

सदन के पटल पर उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि आपके पास बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटें नहीं हैं। जीतने का भरोसा न होने के कारण मुख्यमंत्री ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और बाद में एक सीट से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अभी तक जनता का शुक्रिया भी अदा नहीं किया है।

डीएमके नेता ने बताया कि मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपत्तूर के विधायक को विश्वास मत की कार्यवाही में हिस्सा लेने से रोक दिया था जिससे सत्ताधारी पक्ष की प्रभावी संख्या कम हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश के कारण, सत्ताधारी पार्टी के पास असल में सिर्फ 106 सदस्य ही बचे हैं। यह सरकार सिर्फ उन पार्टियों के समर्थन से चल रही है, जिन्होंने हमारे गठबंधन के हिस्से के तौर पर चुनाव लड़ा और जीता था।

उदयनिधि स्टालिन ने नई सरकार के काम करने के तरीके पर भी तंज कसा और उस पर शासन-प्रशासन के बजाय अपनी छवि चमकाने को ज़्यादा अहमियत देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम रील्स के जरिए शासन करने के बजाय कुछ असली शासन करके दिखाइए।

उदयनिधि ने मुख्यमंत्री विजय की भी आलोचना की, जिन्होंने कथित तौर पर विश्वास मत से पहले एआईएडीएमके के बागी नेताओं से मुलाकात की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये घटनाक्रम बदलाव या सौदेबाजी की राजनीति को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि लोग पूछ रहे हैं कि क्या यही वह 'साफ-सुथरा शासन' है, जिसका वादा किया गया था। उन्होंने घोषणा की कि विश्वास मत के दौरान डीएमके के विधायक विधानसभा से वॉकआउट करेंगे।

वहीं, एआईएडीएमके के महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री ए पलानीस्वामी ने पार्टी के बागी विधायकों से मुख्यमंत्री द्वारा मुलाकात को लेकर सवाल उठाए और विश्वास प्रस्ताव का विरोध करने की बात कही। हालांकि एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाले गुट ने विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया।

इस बीच, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द किए जाने का मुद्दा भी इस बहस में प्रमुखता से उठा।

--आईएएनएस

डीकेएम/पीएम