फिनटेक ने वित्तीय समावेशन को दी नई गति, एमएसएमई ऋण से लेकर डिजिटल भुगतान तक लाया बड़ा बदलाव: आरबीआई गवर्नर
मुंबई, 8 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को कहा कि भारत का फिनटेक क्षेत्र वित्तीय समावेशन, डिजिटल नवाचार और ग्राहक सेवाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि फिनटेक कंपनियों ने देश की विशाल और विविध आबादी को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने का काम पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुलभ और कम लागत पर किया है।
8 से 11 सितंबर तक मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) को संबोधित करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने हमेशा फिनटेक क्षेत्र में जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने उद्योग के भीतर आत्म-नियमन को प्रोत्साहित किया है और ऐसा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ढांचा (पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) विकसित करने में सहयोग किया है, जिस पर फिनटेक कंपनियां नए समाधान तैयार कर सकें।
उन्होंने कहा, "हम नए विचारों और नए प्रतिभागियों के लिए खुले रहे हैं। हमने जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा दिया है, साथ ही विश्वास की रक्षा भी की है, क्योंकि वित्तीय प्रणाली की सबसे बड़ी पूंजी विश्वास ही है।"
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फिनटेक की बदौलत बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले जहां खाता खोलने और भुगतान निपटान जैसी प्रक्रियाओं में काफी समय लगता था, वहीं अब तकनीक के कारण ये प्रक्रियाएं तेज और अधिक प्रभावी हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि फिनटेक ने ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ वित्तीय बुनियादी ढांचे की दक्षता भी बढ़ाई है। डिजिटल तकनीकों की मदद से लेनदेन लागत घटी है, खाते खोलने और भुगतान निपटान का समय कम हुआ है तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित विश्लेषण ने धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम को अधिक प्रभावी बना दिया है।
मल्होत्रा ने आगे कहा कि रियल-टाइम निगरानी और डेटा-आधारित विश्लेषण ने वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आगे कहा कि फिनटेक का सबसे स्पष्ट और प्रभावशाली असर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को ऋण उपलब्ध कराने में देखने को मिला है।
उन्होंने बताया कि कैश फ्लो-आधारित ऋण प्रणाली, अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क और यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) जैसे प्लेटफॉर्म ने छोटे कारोबारों के लिए ऋण प्राप्त करना आसान बनाया है। इससे ऐसे उद्यम भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ पाए हैं, जिन्हें पहले वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती थी।
उन्होंने बताया कि तकनीक-आधारित ऋण वितरण व्यवस्था ने वित्तीय समावेशन को नई मजबूती दी है और देश के उद्यमिता इकोसिस्टम को गति प्रदान की है।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत की डिजिटल और वित्तीय परिवर्तन यात्रा में प्रधानमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने कहा, "हम इस फेस्टिवल में प्रधानमंत्री की उपस्थिति से सम्मानित और उत्साहित हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान बनाई है।"
मल्होत्रा ने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में प्रधानमंत्री की भागीदारी तकनीक, नवाचार और डिजिटल वित्तीय सेवाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फिनटेक क्षेत्र की निरंतर प्रगति के लिए नवाचार और विश्वास के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास का उद्देश्य केवल नई सेवाएं शुरू करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, भरोसेमंद और सभी वर्गों के लिए सुलभ बनाना भी होना चाहिए।
उन्होंने विश्वास जताया कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, फिनटेक नवाचार और मजबूत नियामकीय ढांचे के संयोजन से भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक डिजिटल वित्तीय परिदृश्य में और मजबूत भूमिका निभाएगा।
--आईएएनएस
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