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फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को 5 साल का विस्तार, केंद्रीय कैबिनेट ने 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की दी मंजूरी

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों के शीघ्र निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) योजना को पांच वर्ष के लिए आगे बढ़ाने का फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है।
 

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों के शीघ्र निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) योजना को पांच वर्ष के लिए आगे बढ़ाने का फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है।

योजना के तहत देशभर में 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित किए जाएंगे, जिनमें विशेष पॉक्सो अदालतें भी शामिल होंगी। वर्तमान में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 779 एफटीएससी कार्यरत हैं, जिनमें 399 विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल हैं। सरकार लंबित दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की संख्या को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त जिलों को भी इस योजना के दायरे में लाएगी।

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में दुष्कर्म और बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज मामलों के त्वरित निपटारे के उद्देश्य से की गई थी। इसके बाद योजना को दो बार बढ़ाया जा चुका है और अब इसे एक बार फिर पांच वर्षों के लिए विस्तारित किया गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन अदालतों का प्रदर्शन लगातार महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 2025 में देशभर में कार्यरत 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, जिनमें 398 विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल थीं, ने लगभग 66,500 मामलों का निस्तारण किया। हालांकि, वर्ष के अंत तक करीब 2.45 लाख मामले लंबित रहे। इससे पहले वर्ष 2024 में इन अदालतों ने 85,595 मामलों और वर्ष 2023 में 76,319 मामलों का निपटारा किया था।

एफटीएससी योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को न्यायिक अधिकारियों एवं सहायक कर्मचारियों के वेतन के साथ-साथ अदालतों के दैनिक संचालन के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। योजना की शुरुआत से अब तक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को 1,259.51 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है।

सरकार का मानना है कि योजना के विस्तार से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों के लंबित बोझ को कम करने में मदद मिलेगी तथा पीड़ितों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराया जा सकेगा।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी