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फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले की विधानसभा में हुई कड़ी निंदा, भाजपा ने सुरक्षा में बड़ी चूक बताया

जम्मू कश्मीर, 28 मार्च (आईएएनएस)। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले पर सियासत जारी है। इसे लेकर विधानसभा में शनिवार को जोरदार बहस हुई। नेशनल कांफ्रेंस के विधायक सलमान सागर ने इस मामले पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है।
 
फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले की विधानसभा में हुई कड़ी निंदा, भाजपा ने सुरक्षा में बड़ी चूक बताया

जम्मू कश्मीर, 28 मार्च (आईएएनएस)। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले पर सियासत जारी है। इसे लेकर विधानसभा में शनिवार को जोरदार बहस हुई। नेशनल कांफ्रेंस के विधायक सलमान सागर ने इस मामले पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है।

नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के सदस्यों ने विधायकों की सुरक्षा वापस लेने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर जम्मू में हमला हुआ था। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। इस हमले की कड़ी निंदा होनी चाहिए। सलमान सागर ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले का मुद्दा उठाया और इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला एक बड़े नेता हैं और जब वे ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोग कैसे सुरक्षित रह सकते हैं। उन्होंने डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले की न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं को उचित सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।

नेशनल कांफ्रेंस के विधायक मीर सैफउल्लाह ने कहा कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला एक धर्मनिरपेक्ष और देशभर में जाने-माने चेहरे हैं। डॉ. फारूक अब्दुल्ला एक राष्ट्रवादी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी देश का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने पुलिस पर सवाल उठाते हुए इसे नेताओं और आम लोगों की सुरक्षा में विफल बताया।

भाजपा के विधायक शामलाल शर्मा ने भी डॉ. फारूक अब्दुल्ला की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर सदन में चिंता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा में चूक हुई है और इस बात की जांच होनी चाहिए कि विशेष सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति पर हमला कैसे हुआ। उन्होंने इस हमले को एक बड़ी सुरक्षा चूक बताया और उचित कार्रवाई की मांग की।

वहीद-उ-रहमान पारा ने भी कई विधायकों से सुरक्षा वापस लेने के लिए गृह मंत्रालय पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को रहने के लिए घर नहीं दिया गया है, जिसके कारण उन्हें किराये के मकान में रहना पड़ रहा है। कांग्रेस के विधायक निजाम-उ-दीन भट ने भी डॉ. फारूक अब्दुल्ला की प्रशंसा की और हमलावर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने इस हमले की विस्तृत जांच की भी मांग की।

कैबिनेट मंत्री सकीना ने भी डॉ. फारूक अब्दुल्ला की प्रशंसा की और उन पर हुए हमले की निंदा की। उन्होंने डॉ. फारूक अब्दुल्ला को एक बड़ा राजनीतिक व्यक्तित्व बताया और कहा कि उन पर हुआ हमला एक बड़ी सुरक्षा चूक है। उन्होंने कहा कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने 1996 में सत्ता संभाली थी, जब आतंकवाद अपने चरम पर था। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला पर हुआ जानलेवा हमला चिंता का विषय है। उन्होंने कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस विधायक इफ्तिखार अहमद ने नशे से संबंधित मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को नशे की समस्या के खिलाफ हरसंभव कदम उठाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग केवल नशे में लिप्त युवाओं के इलाज को सुनिश्चित कर सकता है। हमारे पास ऐसे नशा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति नहीं है।

इसके जवाब में कैबिनेट मंत्री सकीना इटू ने कहा कि हमने दूरदराज के इलाकों में रहने वाले युवाओं को सलाह देने के लिए कई पार्षदों को प्रशिक्षित किया है। नशे की लत के बढ़ते मामलों को लेकर हम चिंतित हैं। हम नशे की समस्या पर एक विधेयक पेश करने जा रहे हैं।

--आईएएनएस

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