फडणवीस सरकार का मराठा समाज को बड़ा तोहफा, ओबीसी की तर्ज पर मिलेंगी शैक्षणिक सुविधाएं
मुंबई, 5 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मराठा समाज के विद्यार्थियों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों की तरह विभिन्न शैक्षणिक सुविधाएं और रियायतें देने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के इस कदम को मराठा समाज के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
सरकार ने फैसला किया है कि ओबीसी विद्यार्थियों को मिलने वाली कई शैक्षणिक योजनाओं और लाभों का विस्तार अब मराठा समाज के विद्यार्थियों तक भी किया जाएगा। इसके तहत मराठा समाज के लिए आठ प्रमुख योजनाएं लागू की जाएंगी।
निर्णय के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा (10वीं) के बाद की छात्रवृत्ति योजना, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना तथा मोटर वाहन चालक और परिचालक (कंडक्टर) प्रशिक्षण योजना का लाभ मराठा समाज के विद्यार्थियों को भी मिलेगा।
इसके अलावा विद्यार्थियों को मिलने वाली 16 प्रकार की प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) संबंधी योजनाओं का लाभ भी मराठा समाज के पात्र विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र के निवासी जो विद्यार्थी राज्य के बाहर स्थित अनुदानित और गैर-अनुदानित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेते हैं, वे भी इन योजनाओं के दायरे में आएंगे।
महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन-जिन पाठ्यक्रमों में ओबीसी विद्यार्थियों को शैक्षणिक रियायतें और सुविधाएं प्राप्त करने की पात्रता है, अब उन्हीं सभी पाठ्यक्रमों के लिए मराठा समाज के विद्यार्थी भी पात्र माने जाएंगे।
सरकार ने केंद्रीयकृत प्रवेश प्रक्रिया (सीएपी) पूरी होने के बाद रिक्त बची सीटों पर संस्थान स्तर से प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को भी राहत दी है। प्रवेश नियामक समिति द्वारा अनुमोदित संस्थानों में ऐसे प्रवेश लेने वाले मराठा विद्यार्थियों को भी ओबीसी विद्यार्थियों की तरह शैक्षणिक रियायतों का लाभ मिलेगा।
सरकारी आदेश के अनुसार, वर्तमान में ओबीसी वर्ग को मिलने वाली सभी शैक्षणिक सुविधाएं और रियायतें तथा भविष्य में लागू होने वाली नई सुविधाएं भी अगले आदेश तक स्वतः मराठा समाज के विद्यार्थियों पर लागू होंगी।
राज्य सरकार के इस फैसले को मराठा समाज के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे हजारों विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, फीस प्रतिपूर्ति और अन्य शैक्षणिक सहायता योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
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