इंजीनियरिंग की पढ़ाई, 3 साल सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, शारीरिक अक्षमता की चुनौतियों से पार पाकर प्राची ने जीता ब्रॉन्ज मेडल
गांधीनगर, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एनसीओई), गांधीनगर और 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम का प्रतिनिधित्व करने वाली भारत की पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी प्राची पांडे ने जापान के आइची-नागोया में जारी एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिला एकल क्लास 9 स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। प्राची ने इस स्पर्धा में भारत के लिए पहला मेडल जीतकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर मौजूद प्राची ने सेमीफाइनल में इराक की नजला अल-दाय्येनी के खिलाफ मुकाबला खेला। नजला विश्व रैंकिंग में 5वें स्थान पर हैं और वह मौजूदा पैरालंपिक और एशियन पैरा गेम्स चैंपियन हैं। महाद्वीपीय स्तर पर प्राची का यह प्रदर्शन भारतीय पैरा टेबल टेनिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो उनके दृढ़ संकल्प, सहनशक्ति और प्रतिस्पर्धी जज्बे को दर्शाता है।
15 जनवरी 1993 को उत्तर प्रदेश में जन्मीं प्राची का सफर, लगन और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक कहानी है। शिक्षा से इंजीनियर रहीं प्राची ने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पीईसी) से एम.टेक किया है। पैरा टेबल टेनिस को पूर्णकालिक करियर के रूप में चुनने से पहले, उन्होंने 2020 से 2023 तक एक फुल-स्टैक सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम किया।
प्राची एक ऐसी न्यूरोडीजेनेरेटिव (तंत्रिका तंत्र से जुड़ी) स्थिति से जूझ रही हैं, जिसके कारण उन्हें शारीरिक रूप से काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, उन्होंने लगातार बाधाओं को पार करते हुए खेल के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल की है। 'महिला एकल क्लास 9' श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करते हुए—जो गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ियों के लिए एक 'स्टैंडिंग' (खड़े होकर खेलने वाली) श्रेणी है—उन्होंने पैरा टेबल टेनिस में खुद को भारत की एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है।
खेल के क्षेत्र में प्राची की प्रगति लगातार अच्छे प्रदर्शन और उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरी रही है। उन्होंने 2022 और 2023 में नेशनल पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में महिला एकल का खिताब जीता। दिसंबर 2023 में उन्होंने पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल किया, और इसके बाद 2025 के खेलो इंडिया पैरा गेम्स में भी एक और गोल्ड अपने नाम किया।
उनके अंतरराष्ट्रीय सफर में इंटरनेशनल टेबल टेनिस फेडरेशन (आईटीटीएफ) सर्किट के दौरान कई बार पोडियम फिनिश (पदक जीतना) शामिल रहा है। उन्होंने अपना पहला आईटीटीएफ मेडल 2023 ब्राजीलियन पैरा ओपन में जीता था और तब से वे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में लगातार मेडल जीतती आ रही हैं।
उनकी उपलब्धियों में आईटीटीएफ वर्ल्ड पैरा फ्यूचर गोल्ड कोस्ट 2026 में जीता गया सिल्वर मेडल, और आईटीटीएफ वर्ल्ड पैरा फ्यूचर 2026 नाखोन रत्चासिमा, आईटीटीएफ वर्ल्ड पैरा चैलेंजर काओशुंग 2025 तथा आईटीटीएफ वर्ल्ड पैरा फ्यूचर कोस्टा ब्रावा 2025 में जीते गए ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। प्राची ने अब तक आईटीटीएफ रैंकिंग टूर्नामेंटों में कुल 12 मेडल जीते हैं, जिनमें चार सिल्वर और आठ ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।
प्राची की उपलब्धि खिलाड़ियों के निरंतर विकास और संस्थागत समर्थन के महत्व को दर्शाती है। साई एनसीओई गांधीनगर और खेलो इंडिया कार्यक्रम की एक खिलाड़ी के रूप में, उन्हें प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए मदद मिलती है, साथ ही केंद्र में उनके लिए ट्रेनिंग और रहने-खाने की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
'एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन' (एसीटीसी) के जरिए मिली आर्थिक सहायता ने भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उनकी तैयारियों में मदद की है। उनकी एथलीट प्रोफाइल के अनुसार, एशियन पैरा गेम्स 2026 के दौरान, एसीटीसी के तहत उन्हें ₹26,86,099 की सहायता दी गई थी।
उनका ब्रॉन्ज मेडल जीतना साई एनसीओई गांधीनगर, खेलो इंडिया कार्यक्रम और भारतीय पैरा टेबल टेनिस के लिए गर्व का क्षण है। इंजीनियरिंग से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में सफलता तक का प्राची पांडे का सफर, दृढ़ संकल्प, विपरीत परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता और उत्कृष्टता पाने की लगन का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
--आईएएनएस
एसएम/डीकेपी
