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एकनाथ शिंदे ने डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर जताया शोक, कहा- अपूरणीय क्षति

मुंबई, 15 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका इस दुनिया से जाना एक असाधारण मनोचिकित्सक, साहित्यकार, कवि, नाटककार, अभिनेता, संगीतकार, तबला वादक, चित्रकार, समाजसेवक और दर्शनशास्त्र के सक्रिय अभ्यासी को खोने जैसा है। इसके साथ ही, शिंदे ने नाडकर्णी द्वारा किए गए कार्यों का भी जिक्र किया।
 
एकनाथ शिंदे ने डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर जताया शोक, कहा- अपूरणीय क्षति

मुंबई, 15 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका इस दुनिया से जाना एक असाधारण मनोचिकित्सक, साहित्यकार, कवि, नाटककार, अभिनेता, संगीतकार, तबला वादक, चित्रकार, समाजसेवक और दर्शनशास्त्र के सक्रिय अभ्यासी को खोने जैसा है। इसके साथ ही, शिंदे ने नाडकर्णी द्वारा किए गए कार्यों का भी जिक्र किया।

एकनाथ शिंदे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन का समाचार अत्यंत चौंकाने वाला है। असीम ऊर्जा और हंसमुख व्यक्तित्व के धनी डॉ. नाडकर्णी ठाणे के प्रिय पुत्र थे।"

उन्होंने कहा, "पिछले साढ़े तीन दशकों से उन्होंने मनोचिकित्सा के क्षेत्र में अथक परिश्रम किया। 'सभी के लिए एक स्वस्थ मन' के आदर्श को अपनाते हुए उन्होंने 'इंस्टीट्यूट फॉर साइकोलॉजी' की स्थापना की। हजारों अस्थिर मनों को स्थिरता प्रदान करके वे उनके परिवारों के सच्चे मित्र बन गए। साथ ही, दिवंगत डॉ. सुनंदा अवचट के सहयोग से उन्होंने पुणे में एक नशामुक्ति केंद्र 'मुक्तांगन' की भी स्थापना की। इन दोनों संस्थाओं द्वारा समाज को दी गई सेवा इस बात का एक अनुकरणीय उदाहरण है कि किसी भी स्वयंसेवी संस्था को किस प्रकार कार्य करना चाहिए।"

एकनाथ शिंदे ने बताया, "मनोचिकित्सा के क्षेत्र में पूरी तरह से समर्पित होने के बावजूद उनके भीतर का लेखक और नाटककार, जो उनके कॉलेज के दिनों से ही सक्रिय था, उतना ही जीवंत बना रहा। 'गड्डे पंचविशी', 'वैद्यक सत्ता', तथा 'शहाण्यांचा साइकियाट्रिस्ट' और 'मन मैत्रीच्या प्रदेशात' जैसी पुस्तकें, कुल मिलाकर लगभग 27 प्रकाशित कृतियां, पाठकों द्वारा बेहद पसंद की जाती हैं और उन्हें चिंतन के लिए प्रेरित करती हैं। रंगमंच की दुनिया में, 'जन्म रहस्य', 'त्या तिघांची गोष्ट' और 'रंग माझा वेगळा' जैसे नाटकों ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया।"

उन्होंने कहा, "डॉ. नाडकर्णी के निधन के साथ, हमने एक असाधारण मनोचिकित्सक, साहित्यकार, कवि, नाटककार, अभिनेता, संगीतकार, तबला वादक, चित्रकार, समाजसेवक और दर्शनशास्त्र के सक्रिय अभ्यासी, एक बहुआयामी व्यक्तित्व को खो दिया है। मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।"

--आईएएनएस

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