‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ नारे की नौबत ही क्यों आई: शिवराज सिंह चौहान
भोपाल, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को भोपाल और सांची में आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत की।
केंद्रीय मंत्री पहले भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी में आयोजित श्रीराम फाइनेंस के ‘नवगति’ कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति की राशि वितरित की और उनसे संवाद किया। इसके बाद वह अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के सांची पहुंचे, जहां उन्होंने रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडीज़ ऑफ डायबिटीज़ इन इंडिया के 11वें वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन में मधुमेह की बढ़ती चुनौती, इसके उपचार में हो रही प्रगति, नई चिकित्सा तकनीकों और शोध के क्षेत्र में सामने आ रही संभावनाओं को लेकर विशेषज्ञों के साथ चर्चा हुई।
इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मधुमेह आज केवल किसी व्यक्ति विशेष की बीमारी नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि इसके प्रभावी उपचार के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम, जागरूकता और निरंतर शोध पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान ने नई तकनीकों और रिसर्च ने उपचार के क्षेत्र में कई नए रास्ते खोले हैं। ऐसे में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के बीच बेहतर समन्वय से मधुमेह जैसी बीमारियों के खिलाफ प्रभावी रणनीति तैयार की जा सकती है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर समाज से आत्ममंथन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज यह सोचने की जरूरत है कि ऐसी परिस्थितियां क्यों पैदा हो रही हैं, जब बेटियों को पुरुषों के प्रति अविश्वास जताने वाला नारा लिखना पड़ रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे नारे 'एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा' का जिक्र करते हुए कहा कि यह नारा कभी सार्थक और सफल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि कई बार बेटियों को गलत नजरों से देखने वाले लोग कोई अनजान नहीं, बल्कि जान-पहचान के ही होते हैं। ऐसी घटनाओं से यह सवाल उठता है कि आखिर समाज को क्या हो गया है। उन्होंने कहा कि बेटियों का मान-सम्मान और उनकी इज्जत करना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने पुरुषों, बेटों और उनके माता-पिता से भी आत्ममंथन करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आखिर क्यों ये नौबत आई कि मेरी बेटियों को ये नारा लिखना पड़ रहा है। समाज को इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि वह किस दिशा में जा रहा है। यदि बहन और बेटियां पुरुषों पर विश्वास नहीं कर पाएंगी तो समाज और देश कैसे आगे बढ़ेगा। इसके लिए सभी को संकल्प लेना होगा कि बेटियों, बहनों और माताओं का सम्मान किया जाए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नारी मेरे लिए मां के समान और बेटी देवी के समान है। उनके सम्मान और सुरक्षा के लिए मैं अपनी ओर से हरसंभव प्रयास करता रहूंगा।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय क्रिकेट टीम के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ भारतीय टीम वनडे वर्ल्ड कप में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है और रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रही है, वहीं दूसरी ओर एक भारतीय टीम ने पाकिस्तान को हराकर देशवासियों को खुशी का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि हम एक साथ कई मोर्चों पर जीत सकते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देश के आत्मविश्वास और सामर्थ्य से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय बेटा-बेटियां लगातार देश का मान बढ़ा रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने एक विमान हादसे का भी जिक्र करते हुए भारतीय पायलट के साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि जब इजराइल के नागरिकों से भरे एक विमान को क्रैश करने की कोशिश की गई, तब विमान के जांबाज पायलट ने खुद घायल होने के बावजूद हिम्मत नहीं छोड़ी। चोट लगने के बाद भी पायलट ने धैर्य बनाए रखा, हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए विमान को सुरक्षित नीचे उतारा और सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई।
वहीं, केंद्रीय मंत्री ने एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए पदक विजेताओं को बधाई दी। भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन देश का गौरव बढ़ा रहा है। उन्होंने महिला हॉकी टीम की उपलब्धि का भी जिक्र किया और कहा कि टीम ने चीन को हराकर करीब 40 साल बाद उसके खिलाफ जीत दर्ज करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ी लगातार पदक जीत रहे हैं और यह देश के लिए गर्व की बात है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने ड्राइवरों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की पहल करने पर श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की सराहना करते हुए कहा कि श्रीराम फाइनेंस ने यह पहचाना है कि देश में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों में ड्राइवर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ट्रक चालक कई-कई दिनों तक अपने परिवार से दूर रहते हैं। वे चेन्नई, अहमदाबाद, गुवाहाटी जैसे दूर-दराज के शहरों तक सामान पहुंचाने के लिए निकलते हैं और कई बार आठ-आठ दिन तक अपने बच्चों से मिल नहीं पाते।
उन्होंने कहा कि सामान्य नौकरी करने वाला व्यक्ति सुबह घर से निकलता है और शाम को लौटकर अपने बच्चों से मिल लेता है। किसान भी खेत में काम करने के बाद शाम को घर लौट आता है, लेकिन ड्राइवर और क्लीनर लंबे समय तक अपने परिवार और बच्चों से दूर रहकर काम करते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने भावुक अंदाज में कहा कि हर पिता अपने बच्चों को प्यार करना, उनके साथ खेलना और उनके साथ समय बिताना चाहता है। उन्होंने कहा, हर एक के पास पापा का दिल होता है, लेकिन ड्राइवर अपने बच्चों से दूर रहकर भी देश की सेवा में लगे रहते हैं। उनके मन में अपने बच्चों से दूर रहने का कितना दर्द होता होगा, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ड्राइवर केवल वाहन नहीं चलाते, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की जिंदगी को गति देते हैं। उन्होंने कहा कि किसान की उपज को मंडी और बाजार तक पहुंचाने से लेकर बच्चों को स्कूल पहुंचाने, निर्माण सामग्री की ढुलाई और मरीजों को अस्पताल ले जाने तक ड्राइवरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान को खेत से गेहूं, धान, चना और फल-सब्जियां लेकर खरीदी केन्द्र या बाजार तक पहुंचाना हो तो ट्रक की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि ये ड्राइवर अकेले ट्रक नहीं चलाते, ये देश चलाते हैं, ये लोगों की जिंदगी चलाते हैं। ट्रक हो, बस हो, ऑटो हो या एंबुलेंस, हर जगह ड्राइवर की जरूरत होती है।
शिवराज सिंह चौहान ने बच्चों की छात्रवृत्ति को लेकर कहा कि कक्षा 8वीं से 10वीं तक पढ़ने वाले और 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले बच्चों को सालाना 4 हजार रुपए की छात्रवृत्ति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान कॉपी-किताब, आने-जाने और अन्य जरूरी साधनों के लिए यह राशि बच्चों के लिए मददगार होगी। उन्होंने बताया कि कक्षा 11वीं और 12वीं में छात्रवृत्ति की राशि 4,500 रुपए होगी, जबकि 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को 5 हजार रुपए दिए जाएंगे।
उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि तुम मामा के भांजे-भांजियां हो, सब 90 प्रतिशत से ज्यादा नंबर लाओगे। उन्होंने बच्चों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनके नाम, नंबर और पिता के नाम समेत जरूरी जानकारी का रिकॉर्ड रखा जाएगा। पढ़ाई में कहीं और दिक्कत आए तो मामा तुम्हारे साथ रहेगा, चिंता मत करना। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों के बच्चों की विशेष देखभाल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पिता कई-कई दिनों तक घर पर नहीं होते, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों का ध्यान रखना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और सरकार को भी आगे आना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने श्रीराम फाइनेंस की छात्रवृत्ति योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि कंपनी ने इन बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी में सहयोग का संकल्प लिया है। इन बच्चों के लिए छात्रवृत्ति का जो संकल्प है, सेवा का जो संकल्प है, वह अद्भुत है। मैं इस संकल्प को प्रणाम करता हूं।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ ही रोजगार और कौशल विकास के लिए भी मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य से जुड़ी जानकारी का डेटाबेस उनके पास भी रहेगा और जरूरत पड़ने पर वे अपने संसदीय क्षेत्र के साथ अन्य क्षेत्रों में भी उनकी मदद के प्रयास करेंगे। उन्होंने बच्चों से कहा कि सरकारी नौकरियों की तैयारी के लिए कोचिंग की जरूरत होती है। इसी उद्देश्य से मैंने अपने संसदीय क्षेत्र में ‘मामा कोचिंग क्लास’ शुरू की है, जहां बच्चों को निशुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि बच्चों को कौशल विकास से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें कई बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अपना काम-धंधा शुरू कर सकें, यही प्रयास है। उन्होंने बच्चों से कहा कि पढ़ाई के बाद रोजगार में भी आपके साथ मामा खड़ा रहेगा, क्योंकि तुम्हारी जिंदगी बेहतर बननी चाहिए।
--आईएएनएस
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